गोंडा RPF कस्टडी में मौत, SI- सिपाही की जमानत खारिज:लखनऊ हाईकोर्ट ने कहा- कोविड खत्म, पर हिरासत में मौत की महामारी नहीं थमी


गोंडा में 4 नवंबर 2025 को RPF की हिरासत में संजय सोनकर की मौत के मामले में लखनऊ हाईकोर्ट ने RPF के सब इंस्पेक्टर करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। 15 सितंबर को सुनवाई के बाद मंगलवार को अदालत ने यह आदेश दिया। फैसले की प्रति बुधवार सुबह सामने आई। दोनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज है और अब अग्रिम जमानत नहीं मिलने से उनकी गिरफ्तारी का रास्ता खुल गया है। मामले में एक अन्य RPF सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार का नाम भी FIR में है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान हिरासत में होने वाली मौतों पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कोविड महामारी भले खत्म हो गई हो, लेकिन हिरासत में मौत की घटनाएं रुकती नजर नहीं आ रही हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों पर यह बताने की जिम्मेदारी होती है कि उन्होंने मानव जीवन को तुच्छ नहीं समझा। कोर्ट के अनुसार, मौजूदा चरण में याचिकाकर्ता इस संबंध में पर्याप्त स्पष्टीकरण देने में सफल नहीं रहे, इसलिए राहत देने का आधार नहीं बनता। संजय को पूछताछ के लिए घर से ले जाने का आरोप मृतक के भाई राजू सोनकर की ओर से दर्ज कराई गई FIR के मुताबिक, 4 नवंबर 2025 को सुबह करीब 11:30 बजे RPF के सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार, करण सिंह यादव, सिपाही अमित कुमार यादव और कुछ अन्य जवान संजय को पूछताछ के लिए किनकी गांव स्थित घर से ले गए थे। परिजनों का आरोप है कि उसी दिन शाम करीब 4:30 बजे RPF कर्मी संजय को गांव वापस लाए और बरुआचक में एक दुकानदार से उसकी पहचान कराई। इसके बाद उसे सफेद कार से दोबारा ले जाया गया।
मेडिकल कॉलेज में मृत मिला था संजय परिजनों ने आरोप लगाया था कि इसके बाद संजय के साथ मारपीट की गई, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। 5 नवंबर को उसका शव जिला मेडिकल कॉलेज के शवगृह में मिला। परिवार की शिकायत पर RPF कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। शुरुआती पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में पोस्टमार्टम से मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने और विसरा सुरक्षित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। RPF ने बाद में तीनों नामजद कर्मियों को निलंबित कर विभागीय कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी शुरू की थी। वकील बोले- अब गिरफ्तारी की उम्मीद मृतक के अधिवक्ता प्रकाश वर्मा ने कहा कि पुलिस ने अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की और उन्हें अग्रिम जमानत के लिए अदालत जाने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस से जल्द कार्रवाई की उम्मीद है। उनका कहना है कि संजय के परिवार को न्याय दिलाने के लिए वह अपने अन्य अधिवक्ता साथियों के साथ कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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