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पीलीभीत की विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में 8 आरोपियों को दोषी मानते हुए 3-3 साल की जेल की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी गैंगस्टर एक्ट) अनु सक्सेना की अदालत ने सभी दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। गश्त के दौरान पुलिस को मिली थी गिरोह की सूचना अभियोजन पक्ष के अनुसार, हजारा थाना पुलिस ने मामले का खुलासा किया था। तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ राहुल नगर मजदूर बस्ती (चंदिया हजारा) में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र में एक आपराधिक गिरोह सक्रिय है, जो समाज विरोधी गतिविधियों में शामिल है। अफरोज आलम को बताया गया था गिरोह का सरगना पुलिस की जांच में सामने आया कि महमूद का बेटा अफरोज आलम गिरोह का मुख्य सरगना है। पुलिस के अनुसार, अफरोज ने प्रह्लाद पुत्र नकुल, परितोष पुत्र सुबल, राम भरोसे पुत्र धूरभरन, मंजूर अली पुत्र मुनव्वर अली, पिंटू पुत्र नगीना, रामकुमार पुत्र मुनेश्वर और रबिन महाजन पुत्र सतीश के साथ मिलकर गिरोह बनाया था। आरोप था कि गिरोह लोगों को डराने-धमकाने के जरिए अवैध रूप से पैसे वसूलता था। चार्जशीट के बाद शुरू हुई थी सुनवाई पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया और अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। अदालत ने पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और मामले से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन किया। सभी 8 दोषियों को 3-3 साल की सजा साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी आठ आरोपियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी करार दिया। न्यायाधीश अनु सक्सेना ने प्रत्येक दोषी को तीन साल की जेल और पांच-पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
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गैंगस्टर एक्ट के 8 दोषियों को 3-3 साल की सजा:5-5 हजार रुपए जुर्माना भी लगा, गिरोह बनाकर वसूली का था आरोप