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पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश और विभिन्न बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर लगातार चेतावनी बिंदु से ऊपर बना हुआ है। उन्नाव में गंगा का पानी खतरे के निशान की ओर बढ़ने के बाद अब मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गुरुवार शाम 6 बजे गंगा का जलस्तर 112.07 मीटर दर्ज किया गया था, जो चेतावनी बिंदु 112.00 मीटर से ऊपर था। शुक्रवार सुबह 8 बजे तक जलस्तर घटकर करीब 112.03 से 112.04 मीटर पर पहुंचा। यानी करीब 14 घंटे में केवल 3 से 4 सेंटीमीटर की कमी आई है। जलस्तर में मामूली गिरावट के बावजूद गंगा किनारे बसे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी अब भी जमा हुआ है। निचले इलाकों में घरों और गलियों में भरा पानी गंगा के बढ़े जलस्तर का असर शहर और आसपास के तटीय इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। सैय्यद कंपाउंड, कर्बला, गोताखोर, हुसैन नगर, तेजी पुरवा, मालवीय नगर और श्रीनगर समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। कई गलियां पूरी तरह जलमग्न हैं, जिससे लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने और आवागमन के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ा तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। नाव के सहारे स्कूल पहुंच रहे बच्चे बाढ़ का असर अब बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है। गोताखोर, कर्बला और सैय्यद कंपाउंड जैसे प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल जाने वाले रास्ते पानी में डूब गए हैं। ऐसे में कई बच्चे नाव के सहारे स्कूल पहुंच रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए मजबूरी में बच्चों को नाव से भेजना पड़ रहा है। हालांकि, उन्हें बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बनी हुई है। प्रशासन अलर्ट, संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। राजस्व विभाग और नगर प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और गंगा के किनारे जाने से बचने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जाएंगे। जलस्तर में गिरावट की रफ्तार धीमी, खतरा बरकरार केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार को गंगा के जलस्तर में मामूली गिरावट जारी रह सकती है। अनुमान है कि जलस्तर करीब 112.02 मीटर तक पहुंच सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहने और बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। हर साल बनती है यही स्थिति स्थानीय लोगों का कहना है कि अगस्त और सितंबर के दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने से हर साल इसी तरह की स्थिति बनती है। उनका कहना है कि प्रशासन को केवल राहत कार्यों तक सीमित न रहकर बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में भी काम करना चाहिए। बाढ़ प्रभावित प्रमुख इलाके- स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है, लेकिन गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर होने के कारण खतरा अभी बरकरार है।
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गंगा चेतावनी बिंदु से ऊपर, उन्नाव में बाढ़ का कहर:14 घंटे में सिर्फ 3-4cm घटा जलस्तर; नाव से स्कूल जा रहे बच्चे