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लखीमपुर खीरी में नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था और किताबों की खरीद को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) विनय कुमार मिश्रा ने सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को पत्र जारी कर शासनादेश के अनुसार ही शुल्क लेने और नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को शिकायतें मिली थीं कि कुछ विद्यालय अभिभावकों को निर्धारित स्थानीय दुकानों से ही पुस्तकें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इसे उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है। डीआईओएस ने साफ किया है कि कोई भी विद्यालय छात्रों या उनके अभिभावकों को किताबें, जूते, मोजे और यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए मजबूर नहीं करेगा। फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक करना होगा जारी निर्देशों के मुताबिक, सभी विद्यालयों को अपनी शुल्क संरचना पारदर्शी रखनी होगी। स्कूलों को शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले ही फीस का पूरा विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, अभिभावकों से ली गई हर राशि की रसीद देना भी जरूरी होगा। बीच सत्र में फीस नहीं बढ़ा सकेंगे शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय बिना अनुमति के शैक्षिक सत्र के बीच में फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। प्रशासन का कहना है कि फीस से जुड़ी किसी भी मनमानी पर अब कड़ी नजर रखी जाएगी और शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाएगी। 5 साल से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदलेंगे डीआईओएस ने निर्देशों में यह भी कहा है कि विद्यालय पांच वर्षों से पहले यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेंगे। यदि किसी कारणवश यूनिफॉर्म में बदलाव आवश्यक हो, तो इसके लिए संबंधित शुल्क नियामक समिति से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। उल्लंघन पर होगी कठोर कार्रवाई डीआईओएस विनय कुमार मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ रोकना और विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।
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खीरी में स्कूलों की फीस/किताब-यूनिफॉर्म पर प्रशासन सख्त:अभिभावकों को तय दुकान से किताब-यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे