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कौशांबी में एक निजी अस्पताल को बिना पंजीकरण संचालित पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। यह कार्रवाई प्रसव के दौरान कथित लापरवाही और अव्यवस्थाओं का मामला सामने आने के बाद की गई। अस्पताल के पास अग्निशमन, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी नहीं थे। फतेहपुर के धाता निवासी अमीर अहस ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई की रात वह अपनी बहू नफीस फातिमा को प्रसव के लिए साक्षी हॉस्पिटल लाए थे। डॉक्टरों ने खून की कमी बताकर तीन यूनिट रक्त की व्यवस्था करने को कहा, जिस पर परिवार ने लगभग 25 हजार रुपये खर्च किए। अगले दिन डॉक्टरों ने प्रसूता और गर्भस्थ शिशु की जान का खतरा बताते हुए तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के लिए 20 हजार रुपये और जांच आदि के नाम पर 21 हजार रुपये अतिरिक्त जमा कराए गए। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। उसे तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया गया, जहां एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के नाम पर करीब डेढ़ लाख रुपये और जमा कराए गए। डॉक्टरों ने प्रसूता के बचने की संभावना बेहद कम बताई है। इसके बाद नवजात बच्ची को निजी अस्पताल में रखने के बजाय, अस्पताल प्रबंधन ने उसे टीकाकरण के नाम पर सरकारी अस्पताल भेज दिया। कनैली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर बच्ची की हालत गंभीर पाई गई, जिसके बाद चिकित्सकों ने उसे भर्ती कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। पीड़ित परिवार की शिकायत पर, गुरूवार को सीएचसी कनैली के अधीक्षक डॉ. मुक्तेश द्विवेदी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार के निर्देश पर अस्पताल का निरीक्षण किया। जांच में अस्पताल का पंजीकरण नहीं मिला। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि सीएमओ के निर्देश पर अस्पताल को सील कर दिया गया है। नवजात बच्ची का उपचार जिला अस्पताल में जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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कौशांबी में बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल सील:प्रसूता की हालत बिगड़ी, परिजनों की शिकायत पर हुई कार्रवाई, लाखों वसूलने का आरोप