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कानपुर प्राणि उद्यान से जल्द ही एक बड़ा एनिमल एक्सचेंज होने जा रहा है। इंदौर जू से एक शेरनी कानपुर लाई जाएगी, जबकि इसके बदले कानपुर जू का 10 साल का नर हिप्पोपोटेमस ‘सतीश’ इंदौर भेजा जाएगा। करीब 2 हजार किलो वजनी सतीश को करीब 1000 किलोमीटर दूर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इंदौर जू के अधिकारी और चिकित्सकों की टीम जल्द कानपुर पहुंचकर हिप्पो का चयन करेगी। सतीश को सुरक्षित तरीके से इंदौर पहुंचाने के लिए खास केज और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जा रही है। जू प्रशासन के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने तक उसे इस केज में आने-जाने का अभ्यास कराया जाएगा। इसके बाद केज को बंद कर क्रेन की मदद से ट्रक पर लोड किया जाएगा। इसी ट्रक से सतीश इंदौर जाएगा और वापसी में शेरनी को कानपुर लाया जाएगा। हाइड्रा क्रेन से ट्रक पर लोड होगा 2 टन का हिप्पो कानपुर जू के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. नासिर के मुताबिक, सतीश के बाड़े में विशेष लोहे का केज रखा जाएगा। इसमें उसके खाने-पीने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वह धीरे-धीरे केज में आने का अभ्यस्त हो जाए। करीब एक से डेढ़ महीने बाद जब सतीश केज में सहज हो जाएगा तो उसे बंद करके हाइड्रा क्रेन से ट्रक पर लोड किया जाएगा। सफर के दौरान वाहन की रफ्तार करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रखने की तैयारी है। 11-12 फीट लंबा केज, पैर फंसने से बचाने की व्यवस्था सतीश के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी के मानकों के अनुसार विशेष केज तैयार किया गया है। इसकी लंबाई करीब 11 से 12 फीट, चौड़ाई 6 फीट और ऊंचाई 5 से साढ़े 5 फीट है। केज के फर्श और दीवारों पर मोटी गोल लोहे की छड़ें लगाई गई हैं। इनके बीच करीब 4 इंच का अंतर रखा गया है, ताकि हिप्पो का पैर इनमें फंस न सके। हर 30 मिनट में पानी से नहलाने की तैयारी करीब 1000 किलोमीटर के सफर में सतीश की त्वचा को सूखने से बचाना बड़ी चुनौती होगी। जू प्रशासन के मुताबिक, हिप्पो की त्वचा करीब 30 मिनट में सूखने लगती है। इसलिए ट्रक में पानी के ड्रम, टुल्लू पंप और पाइप रखे जाएंगे। योजना के मुताबिक, रास्ते में करीब हर आधे घंटे में वाहन रोककर सतीश को पानी से नहलाया जाएगा। सफर को इसी हिसाब से तैयार किया जा रहा है, ताकि रास्ते में उसकी सेहत पर नजर रखी जा सके। दिवंगत स्वीपर की याद में रखा गया था नाम डॉ. नासिर के मुताबिक, सतीश का जन्म 2014 में हुआ था। उसका नाम बब्बर शेरों की देखभाल करने वाले एक दिवंगत स्वीपर सतीश की याद में रखा गया था। बचपन में वह अपनी मां के साथ खेलता था और आवाज देने पर उसके पास आ जाता था। 2018 में सतीश ने अपनी मां के साथ मेटिंग की थी। बाद में जब उसकी मां दोबारा बच्चे को जन्म देने वाली थी तो उसने सतीश पर हमला करना शुरू कर दिया। उस समय उसकी जान बचाने के लिए जू प्रशासन ने रातों-रात बाड़े की दीवार तोड़कर उसे दूसरी तरफ सुरक्षित शिफ्ट किया था। मेडिकल चेकअप, डीवॉर्मिंग और हिस्ट्री कार्ड तैयार इंदौर रवाना करने से पहले सतीश का मेडिकल चेकअप किया जा रहा है। उसकी नियमित डीवॉर्मिंग के साथ गोबर की जांच भी कराई जा रही है। ट्रांजिट से पहले जू निदेशक स्तर से ट्रांजिट सर्टिफिकेट और बायोलॉजिस्ट की ओर से सतीश का हिस्ट्री कार्ड तैयार किया जाएगा। इसमें उसके माता-पिता, जन्म स्थान और अब तक हुए मेडिकल ट्रीटमेंट की जानकारी दर्ज होगी। फिलहाल कानपुर जू में 5 हिप्पोपोटेमस हैं। सतीश के इंदौर जाने के बाद यहां 4 हिप्पो रह जाएंगे।
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कानपुर के हिप्पो 'सतीश' का इंदौर होगा ट्रांसफर:10 साल के नर हिप्पो का होगा एनिमल एक्सचेंज, हर 30 मिनट में नहलाया जाएगा