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मध्य प्रदेश में इस बार मानसून कमजोर रहने के संकेत हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। प्रदेश में औसत 37.3 इंच के मुकाबले 30 से 32 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। वहीं, मानसून की एंट्री भी तय समय से 5 से 8 दिन देरी से, यानी 20 जून के बाद होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, इंदौर, उज्जैन, सागर और चंबल संभाग के केवल 8 जिलों में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है, जबकि अधिकांश जिलों में बारिश औसत से कम रह सकती है। जून में बारिश कमजोर रहने के आसार हैं। हालांकि, जुलाई में मानसून कुछ बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कमजोर मानसून के पीछे अल-नीनो प्रभाव प्रमुख वजह हो सकता है। इसके असर से मानसूनी हवाओं की रफ्तार और बारिश का पैटर्न प्रभावित होता है। कम बारिश की स्थिति में प्रदेश में फसलों के उत्पादन के साथ पेयजल और सिंचाई संकट गहराने की आशंका भी जताई जा रही है। इस साल कहां, कैसा रहेगा मानसून? कम बारिश-घटेगा उत्पादन, जलसंकट भी प्रदेश में साल 2024 और 2025 में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा था। इस वजह से फसलों को काफी फायदा पहुंचा था। सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 2 क्विंटल तक बढ़ गया था। वहीं, गेहूं-चने के लिए भी अच्छा पानी मिला था। इससे उत्पादन बढ़ गया। गेहूं का उत्पादन भी अच्छा हुआ। यही कारण है कि सरकार ने ही समर्थन मूल्य पर 104 टन से अधिक गेहूं खरीद लिया। इस साल यदि कम बारिश होती है तो पेयजल के साथ सिंचाई के लिए भी दिक्कतें खड़ी हो सकती है। फसलों के साथ पेयजल संकट भी सामने आएगा। पिछले साल अच्छी बारिश होने के बावजूद प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं, जहां पर पानी का संकट है। इंदौर, ग्वालियर में तो पानी के लिए लोग सड़क पर उतर चुके हैं। ग्वालियर समेत कई जिलों में लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। इस साल अच्छी बारिश नहीं होने से भविष्य में पेयजल संकट भी गहराएगा। जून में सामान्य से कम बारिश मौसम विभाग ने बताया कि जून में मध्य प्रदेश में सामान्य से भी कम बारिश होगी। जुलाई में मानसून कुछ बेहतर बरसेगा। अल-नीनो के चलते मानसून कमजोर पड़ेगा मौसम विभाग ने कहा कि कमजोर मानसून के पीछे की वजह अल-नीनो है। जून में अल नीनो का असर दिख सकता है। जुलाई और अगस्त में भी कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो बने रहने की संभावना है। अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलधार बारिश और बाढ़ आती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा, तब वह प्रशांत महासागर से भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। इससे बारिश पर असर पड़ेगा। अब जानिए, किस साल कितनी हुई बारिश 2017 में हुई भी सबसे कम बारिश, 2019 में जमकर बरसात 10 साल के बारिश के आंकड़े पर नजर डालें तो साल 2017 में सबसे कम बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच है। इसके मुकाबले औसत 29.9 इंच बारिश हुई थी। साल 2018 में 34.3 इंच बारिश दर्ज की गई थी। सबसे ज्यादा बारिश साल 2019 में 53 इंच हुई थी। वहीं, 2021 और 2023 में सामान्य से थोड़ी ही कम बारिश हुई थी। 2024 में 44.1 इंच पानी गिरा तो 2025 में आंकड़ा 45.2 इंच तक पहुंच गया। इस तरह कह सकते हैं कि 7 साल से प्रदेश में अच्छी बरसात हो रही है। अब इस साल मानसून से भी यही उम्मीदें हैं। अब ग्राफिक्स से जानिए 2025 में हुई बारिश की तस्वीर 121% बारिश… अनुमान से 15% ज्यादा हुई थी, भोपाल समेत 30 जिलों में ‘बहुत ज्यादा’ गिरा पानी पिछले साल प्रदेश में मानसून जमकर बरसा था। कुल 3 महीने 28 दिन मानसून बरसा और 10 साल में तीसरी बार सबसे ज्यादा पानी गिरा। वहीं, भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिले ऐसे रहे, जहां ‘बहुत ज्यादा’ बारिश दर्ज की गई। ओवरऑल सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला गुना रहा। वहां पूरे सीजन 65.7 इंच पानी गिरा, जबकि श्योपुर में औसत के मुकाबले 216.3% बारिश हुई। शाजापुर ऐसा जिला था, जहां सबसे कम 28.9 इंच (81.1%) ही बारिश हुई। 50 जिलों में कोटे से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मानसून को लेकर मौसम विभाग ने अपना आकलन भी जारी किया था, जिसमें पूरे मानसूनी सीजन में प्रदेश में 106 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था। इस अनुमान से 15 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर गया। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में दोगुनी बारिश हो गई। ऐसे समझें, कम-ज्यादा बारिश का गणित… यह खबर भी पढ़ें… एमपी- ग्वालियर और मुरैना में बारिश: 6 जिलों में लू, आंधी-बारिश और ओले का अलर्ट, 27 जिलों में 43 डिग्री के ऊपर रहेगा पारा मध्य प्रदेश में नौतपा के बीच मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। ग्वालियर में शुक्रवार सुबह 6 बजे से रुक-रुक कर, जबकि मुरैना जिले में तेज बारिश हुई। अचानक बदले मौसम से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। बता दें कि गुरुवार को भी दमोह समेत कई जिलों में ओले गिरे और बारिश हुई। पढ़ें पूरी खबर…
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एमपी में अल-नीनो की वजह से कमजोर रहेगा मानसून:20 जून के बाद होगी एंट्री, 30 से 32 इंच पानी गिरने का अनुमान; 8 जिलों में सामान्य मानसून के संकेत