एंबुलेंस ड्राइवर चिल्लाता रहा… बुजुर्ग मरीज ने तोड़ा दम:7 Km जाने में लगा एक घंटा, परिजन बोले- हैलट पुल पर फंसे रहे 25 मिनट


सायरन बजाते हुए चालक ने एम्बुलेंस को कभी दाएं तो कभी बाएं से निकालने का प्रयास किया, लेकिन वाहन सवारों ने जल्द निकलने की होड़ में जरा सा भी रास्ता नहीं दिया। इतना ही नहीं मरीज की जान बचाने के चक्कर में एम्बुलेंस चालक ने चिल्ला-चिल्लाकर माइक से एनाउंस कर रास्ता छोड़ने तक की गुहार लगाई। इसके बावजूद भी घर से कार्डियोलॉजी की करीब 7 किलोमीटर की दूरी तय करने में 12 से 15 मिनट के बजाए करीब एक घंटा का समय लग गया। रास्ते में एम्बुलेंस पहले फजलगंज, फिर मरियमपुर चौराहा और इसके बाद हैलट पुल पर जाम के झाम में फंसी रही। करीब 25 मिनट बर्बाद होने के बाद जब डब्ल्यू वन ब्लॉक साकेत नगर में रहने वाले 75 वर्षीय रामचंद्र शुक्ला कार्डियोलॉजी पहुंचे तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह दर्द एम्बुलेंस में पीछे बैठी मृतक की भाभी ओमी शुक्ला ने नम भरी आंखों से बयां किया। देवर की मौत के बाद वह शहर की यातायात व्यवस्था व जिम्मेदारों को कोसती रही। अब जानिए पूरा मामला… साकेत नगर डब्ल्यू वन ब्लॉक स्थित गुरु समृद्धि अपार्टमेंट में निवासी 75 वर्षीय रामचंद्र शुक्ला रंग का कारोबार करते है। परिवार में पत्नी कमला, शादीशुदा बेटा अभिषेक व रितेश के अलावा बेटी रचिता उर्फ सौम्या जयपुर में रहती है। बेटा अभिषेक इंग्लैंड में सॉफ्टवेयर इंजीनियर व रितेश नोएडा में इंजीनियर है। तुलसी विहार में रहने वाली भाभी ओमी शुक्ला ने बताया कि देवर रामचंद्र शुक्ला की करीब चार साल पहले बाईपास सर्जरी हुई थी। बुधवार को पूजा करने के बाद जैसे ही देवर शंख उठाने के लिए झुके तो वह अचेत होकर फर्श पर गिर पड़े। उनकी पत्नी ने करीब सुबह 11 बजे फोन कर उन्हें व यशोदा नगर निवासी दामाद अनिल त्रिपाठी को घटना की जानकारी दी। आनन-फानन में वह व अनिल घर पहुंचे और किसी तरह रामचंद्र को पास के पीपीएम हॉस्पिटल ले गए। डॉक्टरों ने उन्हें देख कर कॉर्डियोलॉजी ले जाने की सलाह दी। हॉस्पिटल की एम्बुलेंस से वहां के लिए निकले। इसके बाद फजलगंज, मरियमपुर चौराहे व हैलट पुल के पास जाम के झाम में इस कदर उलझे कि 25 मिनट पूरा बर्बाद हो गया। इस दौरान एम्बुलेंस चालक ने गाड़ी निकालने की हर संभव कोशिश की, लेकिन रास्ता न होने की वजह से गाड़ी सिर्फ हिल ही सकी। सबसे ज्यादा समय हैलट पुल पर ले गया, जहां बेतरतीब खड़े वाहनों की अराजकता को एम्बुलेंस का सायरन तक नहीं सुनाई दे रहा था। जैसे-तैसे कार्डियोलॉजी पहुंचे तो डॉक्टरों ने रामचंद्र को मृत घोषित कर दिया। सायरन सुनने के बाद भी ट्रैफिक पुलिस फरमाती रही आराम भाभी ओमी शुक्ला का आरोप है कि, जाम में फंसी एम्बुलेंस जिस वक्त सायरन बजा रही थी तो फजलगंज व मरियमपुर चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस आराम फरमा रही थी। छांव के चक्कर में एक तरफ बैठे यातायात पुलिसकर्मियों ने वाहनों को किनारे कर जाम से एम्बुलेंस से निकालने की कोशिश तक नहीं की, जबकि चालक एम्बुलेंस के माइक से चीख-चीखकर मरीज होने की बात कहता रहा। गनीमत रही कि हैलट पुल पर एक कैमरे का फ्लैश चमकने पर ट्रैफिक पुलिस ने कुछ देर बाद जाम खुलवाने की खानापूरी करने में लग गए। पत्नी व बेटी बदहवास, बेटों का रो-रोकर बुरा हाल पिता रामचंद्र की मौत की जानकारी मिलते ही इंग्लैंड से उनका बेटा अभिषेक व नोएडा से रितेश देर रात ही घर आ गए। घर आते ही उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि पत्नी कमला व बेटी रचिता बदहवास हो गई। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार दोपहर भगवतदास घाट में किया गया है। मौत के बाद नौबस्ता में चला अभियान रामचंद्र की मौत के बाद नगर निगत का प्रवर्तन दल गुरुवार दोपहर नौबस्ता पहुंचा, जहां उन्होंने चौराहे पर खड़े वाहनों को वहां से भगाया। साथ ही चालक को चौराहे पर बेतरतीब वाहनों को खड़ा न करने का अल्टीमेटम दिया। हालांकि, टीम के जाने के बाद चौराहे का हाल फिर से जस के तस हो गए।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *