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बांदा शहर के झील का पुरवा स्थित बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में दो छात्रों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रविवार रात करीब 3 बजे पहले 12 साल के नितिन कुमार की तबीयत बिगड़ी। करीब आधे घंटे बाद 8 साल के अरुण की हालत भी खराब हो गई। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। नितिन ने सुबह करीब 5 बजे दम तोड़ दिया, जबकि अरुण की सुबह करीब 6:33 बजे मौत हो गई। एक ही हॉस्टल में कुछ ही घंटों के अंतराल में दो बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया। दोनों की मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। कक्षा 6 और 2 में पढ़ते थे दोनों बच्चे
मृतकों की पहचान गिरवां क्षेत्र के सरसवाह गांव निवासी 12 वर्षीय नितिन कुमार, पुत्र सुनील कुमार प्रजापति और तिंदवारी थाना क्षेत्र के मेहंदू गांव निवासी 8 वर्षीय अरुण, पुत्र पुष्पराज के रूप में हुई है। नितिन कक्षा छह और अरुण कक्षा दो का छात्र था। दोनों आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। नितिन करीब दो साल से इसी विद्यालय में पढ़ रहा था। वह चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। उसके पिता खेती करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। वहीं अरुण अपने बड़े भाई उत्कर्ष के साथ विद्यालय में पढ़ता था। उत्कर्ष कक्षा छह में है। परिजनों के अनुसार दोनों भाइयों का जुलाई में एक साथ दाखिला कराया गया था।
एक हॉल में करीब 20 बच्चे सोते हैं
विद्यालय परिसर के अंदर ही हॉस्टल बना हुआ है। बच्चों की कोचिंग दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू होती है और शाम 5:30 बजे तक चलती है। इसके बाद बच्चे खेलने जाते हैं। रात करीब 8 बजे खाना खाने के बाद लगभग 10:30 बजे बच्चे सो जाते हैं। बताया गया है कि एक हॉल में करीब 20 बच्चे सोते हैं। रविवार रात भी बच्चे खाना खाने के बाद सोने चले गए थे। रात करीब 3 बजे नितिन की तबीयत अचानक खराब हुई। करीब 30 मिनट बाद अरुण की भी हालत बिगड़ गई। दोनों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मोमोज और फिंगर खाने की बात, परिजनों ने जताई आशंका
दोनों बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने उनके खान-पान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। परिवार के लोगों के मुताबिक, बच्चों ने स्कूल में रहने के दौरान मोमोज और फिंगर खाने की बात बताई थी। परिजनों का कहना है कि वे समय-समय पर बच्चों को 10-20 रुपए भी देते थे, जिससे वे बाहर से खाने-पीने की चीजें खरीद लेते थे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों बच्चों की मौत का संबंध मोमोज या किसी अन्य खाद्य पदार्थ से है। मौत की वास्तविक वजह जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। एक सप्ताह से फोन पर बात नहीं होने का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चों को मोबाइल फोन से बात करने की आसानी से अनुमति नहीं दी जाती थी। परिवार के मुताबिक करीब एक सप्ताह तक बच्चों से फोन पर बातचीत नहीं हो पाई थी। हालांकि घटना से एक दिन पहले नितिन ने अपने पिता से फोन पर बात की थी। परिजनों के अनुसार नितिन 3 अगस्त को विद्यालय गया था। उसे स्कूल पहुंचाने में परिवार की एक अन्य बच्चे ने मदद की थी। हॉस्टल की साफ-सफाई पर भी उठाए सवाल
दोनों छात्रों की मौत के बाद परिजनों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हॉस्टल के आसपास जंगल और मच्छरों की समस्या है। परिसर में साफ-सफाई भी ठीक नहीं रहती। जहां खाना बनाया जाता है, वहां भी गंदगी होने का आरोप परिजनों ने लगाया है। एक ही हॉस्टल में कुछ घंटों के अंतराल में दो मासूम छात्रों की मौत से परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस बच्चों की तबीयत बिगड़ने के समय, उनके खान-पान, हॉस्टल की व्यवस्थाओं और विद्यालय प्रबंधन से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की मौत:रात 3 बजे बिगड़ी तबीयत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार