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सुल्तानपुर में गांधी जयंती की शाम शहर भर में तेज आवाज और वाइब्रेशन वाले डीजे के विरोध में ‘घर सुल्तानपुर फाउंडेशन’ ने शांति मार्च निकाला। शुक्रवार शाम 6 बजे ये मार्च तिकोनिया पार्क पहुंचा। अधिवक्ता एक समाजसेवी जीतेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया पिछले कुछ समय और बीते सालों में डीजे की तेज आवाज और अत्यधिक वाइब्रेशन के कारण कई दुर्घटनाएं व मौतें हुई हैं। इससे दुर्गा पूजा जैसे ऐतिहासिक और भव्य पर्व की दिव्यता प्रभावित हो रही है। इस मुद्दे को लेकर पूजा समितियों और स्थानीय प्रशासन से बातचीत कर डीजे की आवाज, कम्पटीशन और वाइब्रेशन कम करने का आग्रह किया गया था, लेकिन कोई खास असर नहीं हुआ। फाउंडेशन के प्रतिनिधि राघवेंद्र ने इस मामले पर जनहित याचिका भी दायर की है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले 18 डीजे संचालकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। सपा के विधानसभा अध्यक्ष गुफरान सैफी ने कहा समस्या त्योहारों से नहीं, बल्कि डीजे के अत्यधिक तेज वाइब्रेशन, इको और हमिंग साउंड से है, जिससे कई लोगों की जानें भी गई हैं। इससे मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को काफी तकलीफ होती है। यह पहल किसी विशेष त्योहार या धर्म के विरुद्ध नहीं है, बल्कि पूरे साल आने वाले सभी त्योहारों पर लागू होती है। हाल ही में ‘बारावफात’ (12 रबी-उल-अव्वल) के दौरान भी लोगों से साउंड कम रखने का निवेदन किया गया था, जिसका असर देखा गया। ‘घर सुल्तानपुर फाउंडेशन’ के वॉलंटियर अनुराग गुप्ता ने बताया कि त्योहारों में डीजे के तेज वाइब्रेशन और शोर के कारण बुजुर्गों व मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अनुराग गुप्ता ने अपना व्यक्तिगत दर्द साझा करते हुए बताया कि डीजे के तेज वाइब्रेशन और शोर के कारण उनके ताऊजी को हार्ट अटैक आ गया था और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्गा पूजा व अन्य उत्सवों की जो पारंपरिक भव्यता होती थी, वह अब डीजे के भारी शोर के पीछे विलुप्त होती जा रही है और सारा पैसा डीजे पर खर्च किया जा रहा है।
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सुल्तानपुर में डीजे के तेज शोर और वाइब्रेशन का विरोध:शांति मार्च निकाल कर शहर वासियों को किया जागरूक