अखिलेश ने केशव-ब्रजेश पाठक की REEL शेयर की:लिखा- दो स्टूलों से कुर्सी नहीं बनती, केशव का जवाब-हिट जोड़ी से घबराना जायज


सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की रील शेयर की है। बैकग्राउंड में गाना लगाया कि दुनिया के ठगों से बचने जरा। साथ ही कैप्शन लिखकर तंज भी कसा। उन्होंने लिखा- दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती। अब 14 घंटे बाद केशव मौर्य ने अखिलेश के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा- एक फिट और हिट जोड़ी से आपका घबराना जायज है। आपके संरक्षण में वंचित-मजदूर वर्गों पर किए गए अत्याचारों को प्रदेश न भूला है, न ही भूलेगा। जनता कमल खिलाकर इसका हिसाब लेगी। अखिलेश की रील में सॉन्ग बज रहा-दुनिया के ठगों से बचने जरा
अखिलेश ने शुक्रवार रात 10 बजे रील शेयर की। इसमें हंसते-मुस्कुराते दोनों डिप्टी सीएम की जुगलबंदी दिख रही है। दोनों पार्क में टहल रहे हैं। बैकग्राउंड में सॉन्ग बज रहा है…दुनिया के ठगों से बचने जरा। इनके दिल में है पाप भरा। इनकी बातों में आना नहीं। केशव ने लिखा- हम दोनों की जोड़ी जनता के भरोसे की पहचान केशव ने शनिवार सुबह 10 बजे X पर पटलवार करते हुए लिखा- आपकी जानकारी के लिए यह अच्छा भी है, क्योंकि केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की जोड़ी आज जनता के भरोसे की पहचान बन चुकी है। मैं महान चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के वंश का प्रतिनिधि हूं। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर अखंड भारत के निर्माण के लिए संकल्पित हूं। इसके साथ ही करुणावतार भगवान गौतम बुद्ध की विरासत से भी जुड़ा हूं, जिन्होंने संसार को शांति, समता और न्याय का मार्ग दिखाया। लेकिन योजनाबद्ध तरीके से आपके संरक्षण में शाक्य समाज सहित कुशवाहा, मौर्य, सैनी और अन्य वंचित-मजदूर वर्गों पर किए गए अत्याचारों को प्रदेश न भूला है, न ही भूलेगा। इन अन्यायों का जवाब आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से कमल खिलाकर दिया जाएगा। 2047 तक विकसित भारत और विकसित यूपी के संकल्प के साथ हर अन्याय का पूरा हिसाब किया जाएगा।
अखिलेश ने जिस वीडियो को शेयर किया, उसके बारे में जानिए
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव मौर्य का यह वीडियो शुक्रवार का बताया जा रहा है। बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर दोनों डिप्टी सीएम कुशीनगर पहुंचे थे। वीडियो में ब्रजेश पाठक कह रहे हैं- हमें भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में आने का मौका मिला है। हमारे साथ हमारे साथी और परिवार के सदस्य केशव मौर्य जी हैं। यह एक अद्भुत संयोग है। आज अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस भी है। भगवान बुद्ध ने देश को प्रेम और करुणा का संदेश दिया। वह आज भी चिरस्थायी रूप से जागृत है। यह इस धरा पर आकर महसूस हो रहा है। जिस तरीके से भारत आगे बढ़ रहा है, उसे देखकर यह स्पष्ट है। इसलिए मैं प्रदेश के जवानों से कहना चाहता हूं- उठो जवानों, तुम्हें जगाने क्रांति द्वार पर आई है। मोदी जी का बिगुल बज चुका है। जाग उठी है तरुणाई। नमो बुद्धाय। एक्सपर्ट बोले- अखिलेश नहीं चाहते कि पीडीए का काउंटर आ पाए
वरिष्ठ पत्रकार और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रेम कांत त्रिपाठी कहते हैं- अखिलेश ने ठग कह कर करारी चोट की है, वे पीडीए की राजनीति कर रहे हैं। नहीं चाहते कि पीडीए का काउंटर आ पाए। वहीं, केशव ने खुद को भारतीयता, हिंदुत्व के साथ साथ मौर्य वंशज की बात कर जनता को प्राचीन गौरव से जोड़ने की कोशिश की है। वे कहते हैं- केशव खुद को चंद्रगुप्त मौर्य तो बता रहे हैं, लेकिन ब्रजेश पाठक को चाणक्य नहीं बता रहे हैं। खास बात ये भी है कि अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। केशव मौर्य मौजूदा समय में उप मुख्यमंत्री हैं। भाजपा पिछड़े नेता का जवाब पिछड़े नेता से ही दिलवा रही है। मुख्यमंत्री खुद अखिलेश यादव का सीधा जवाब देने से बचते रहे हैं। पहले भी हो चुका है केशव-अखिलेश टकराव केशव और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच आमने-सामने होने की मुख्य वजह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है, जो ओबीसी वोट बैंक की राजनीति से जुड़ी है। दोनों ओबीसी समाज से आते हैं। दोनों बीच यह कोई पहला टकराव नहीं है। इससे पहले भी कई बार दोनों नेता आमने-सामने आ चुके हैं। विधानसभा में भी दोनों नेताओं के बीच तू–तड़ाक भी हो चुकी है। जातिगत जनगणना को लेकर दोनों नेताओं के बीच श्रेय लेने की होड़ सामने आई थी। अखिलेश ने दावा किया था कि यह उनकी पार्टी के दबाव का नतीजा है, जबकि मौर्य ने इसे भाजपा की उपलब्धि बताया था। इसके अलावा, महाकुंभ के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, जब अखिलेश ने संगम के जल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे, और मौर्य ने इसे “सनातन धर्म का अपमान” करार दिया था। अखिलेश इससे पहले केशव मौर्य को दिल्ली का प्यादा और दिल्ली के वाई-फाई का पासवर्ड भी कह चुके हैं। जिसका जवाब मौर्य ने सपा को विलुप्त होने की कगार पर बताकर दिया था। केशव समय समय पर समाजवादी पार्टी को समाप्तवादी पार्टी कह कर भी संबोधित करते रहे हैं। अखिलेश ने लोकसभा चुनाव के बाद केशव पर हमले तेज किए
जानकारों का मानना है, लोकसभा चुनाव में अखिलेश का PDA का फॉर्मूला सफल रहा है। सपा के 37 सांसदों में से 23 पिछड़े वर्ग से हैं। इनमें 7 कुर्मी, 6 यादव, 2 मौर्य-कुशवाहा, 2 निषाद, लोधी, शाक्य और राजभर समाज से एक-एक सांसद है। भाजपा के 33 में से मात्र 9 सांसद पिछड़े वर्ग के हैं। उसके बाद से अखिलेश ने केशव पर हमले तेज कर दिए। अखिलेश कभी उन्हें ‘दिल्ली का मोहरा’ बताते हैं, तो कभी ‘सौ लाओ सरकार बनाओ’ का ऑफर देते हैं। ————————— भास्कर सर्वे यूपी में भाजपा पसंद, लेकिन विधायक बदलने होंगे:सहयोगी दलों के नुकसान का फायदा भाजपा को, सपा की सीटें भी बढ़ रहीं
यूपी विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने में सिर्फ 8 महीने शेष हैं। सभी पार्टियां चुनाव की तैयारी में जुट गईं हैं। दैनिक भास्कर के सबसे बड़े सर्वे के नतीजों में सामने आया कि यूपी में भाजपा लोगों की पहली पसंद है, लेकिन 2027 चुनाव जीतने के लिए विधायकों के चेहरे बदलने होंगे। लोग मंत्रियों और विधायकों से नाराज दिखे। पढ़ें पूरी खबर

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