कोलकाता3 मिनट पहले
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पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के पास बंगाल की खाड़ी में डूबे एक ट्रॉलर से आठ दिन बाद नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए हैं। छह मछुआरे अब भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।
‘जय मां काली’ नाम का ट्रॉलर 2 जुलाई को पूर्व मेदिनीपुर जिले के शंकरपुर मछली बंदरगाह से 15 मछुआरों को लेकर समुद्र में मछली पकड़ने निकला था। 6 जुलाई के बाद ट्रॉलर से संपर्क टूट गया था।
अधिकारी ने बताया कि समुद्र में कई दिन रहने के कारण शव बुरी तरह सड़ चुके हैं और उनकी पहचान करना मुश्किल है। अब उनकी पहचान डीएनए (DNA) जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को पीएमएनआरएफ (PMNRF) से दो-दो लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है।

आठ दिन की तलाश के बाद मिला डूबा ट्रॉलर
जिला प्रशासन के मुताबिक, पुलिस और भारतीय तटरक्षक बल ने आठ दिन की तलाश के बाद शनिवार को बक्खाली तट से करीब 35 किलोमीटर दूर बाघेर चार के पास डूबे ट्रॉलर का पता लगाया।
रविवार को कई मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों की मदद से इसे पाथरप्रतिमा के सीतारामपुर तट तक लाया गया। इसके बाद पूरी रात चले राहत अभियान में ट्रॉलर के अंदर से नौ मछुआरों के शव निकाले गए।
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी में खराब मौसम के कारण ट्रॉलर पलट गया होगा। हालांकि, हादसे की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
ओडिशा के तीन सगे भाई भी लापता
लापता मछुआरों में ओडिशा के बालासोर जिले के तीन सगे भाई- रवींद्र माझी (52), जयराम माझी (49) और जगन्नाथ माझी (45) शामिल हैं। उनके रिश्तेदार संन्यासी माझी ने बताया कि तीनों पहले भी कई बार मछली पकड़ने के लिए शंकरपुर जाते रहे थे।
अधिकारी ने बताया कि ट्रॉलर पर शुरुआत में 16 लोगों के जाने की योजना थी, लेकिन एक व्यक्ति किसी कारणवश नहीं गया। बाकी मृतक और लापता मछुआरे पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा और नदिया जिलों के रहने वाले हैं। काकद्वीप उप-मंडलीय अस्पताल की मोर्चरी के बाहर उनके परिजन अब भी इंतजार कर रहे हैं।
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