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उत्तर प्रदेश में बिजली खराबी की शिकायतें समय पर नहीं सुनी जाती। प्रदेश में 40 प्रतिशत से अधिक शिकायतें समय–सीमा के बाद सुनी गईं। इसका बड़ा कारण कर्मचारियों की कमी को बताया जा रहा है। बिजली निगमों में बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी के चलते बिजली संबंधी सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। उपभोक्ता परिषद का दावा है कि 1 अप्रैल से 19 जुलाई के बीच बिजली उपलब्ध होने के बावजूद समय पर फॉल्ट नहीं सुधारे गए। इसी वजह से भीषण गर्मी में लाखों उपभोक्ता परेशान हुए। प्रदेश के किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ा। इस दौरान कुल 45.91 लाख शिकायतें मिलीं। पर विभाग 27.09 लाख शिकायतों को ही तय समय सीमा के अंदर दूर कर पाया। 18.77 लाख शिकायतें तय समय बीतने के बाद दूर किया। 4,527 शिकायतें तो अब भी लंबित हैं। ‘संविदाकर्मियों की छंटनी से बढ़ा फॉल्ट सुधारने का समय’ परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि हर विद्युत उपकेंद्र पर 24 घंटे में तीन शिफ्टों में एक-एक गैंग काम कर रही है। जबकि एक उपकेंद्र से कई फीडरों का संचालन होता है। संविदाकर्मियों की संख्या कम होने से यदि एक साथ कई स्थानों पर ब्रेकडाउन हुआ तो समय पर फॉल्ट ठीक करना उस गैंग के लिए संभव ही नहीं है। बिजली उपलब्ध होने के बावजूद केवल तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण उपभोक्ताओं को समय पर सप्लाई नहीं मिल पा रही। ‘बचत लाखों की, नुकसान करोड़ों का’ उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि बिजली निगमों ने संविदाकर्मियों की संख्या घटाकर वेतन मद में थोड़ी बचत तो कर ली, लेकिन इसकी कीमत प्रदेश के उपभोक्ताओं, व्यापारियों, किसानों और उद्योगों को करोड़ों रुपए के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी। परिषद ने राज्य सरकार से मांग की है कि फील्ड में पर्याप्त संख्या में संविदाकर्मियों की तत्काल तैनात करने की मांग की है।
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UP में बिजली फाल्ट तक समय पर नहीं सुधर रहे:प्रदेश में 40% से अधिक शिकायतें समय–सीमा के बाद दूर हुईं