प्रमोद यादव। प्रयागराज4 मिनट पहले
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प्रयागराज के बैंक रोड स्थित ‘सागर अकादमी’ में शुक्रवार को प्रगतिशील म्यूजिकल बैंड ‘द सॉंग ऑफ़ यूथ’ (The Song of Youth) का पहला सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। युवाओं के इस जोशीले बैंड ने संगीत, नज्मों और कविताओं के जरिए समाज, संघर्ष और बदलाव के स्वर को प्रभावी तरीके से पेश किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में बैंड की सदस्य अंजलि ने बताया कि ‘द सॉंग ऑफ़ यूथ’ अपनी इस पहली प्रस्तुति को महान जनकवि गजानन माधव मुक्तिबोध के स्मृति दिवस पर उन्हें समर्पित कर रहा है। उन्होंने नोएडा मजदूर आंदोलन के दौरान जेल में बंद मजदूर कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और छात्र कार्यकर्ताओं के प्रति भी एकजुटता दिखाई।


अंजलि ने कहा कि यह प्रस्तुति उन सभी संघर्ष करने वाले लोगों को समर्पित है, जो एक बेहतर और न्यायपूर्ण दुनिया बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और बलिदान दे रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के उद्देश्य पर बात करते हुए अंजलि ने देश के मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘आज हम ऐसे दौर में हैं, जहां चारों ओर निराशा का माहौल है। प्रगतिशील विचारों और आजाद ख्यालों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं। कला को कैद करने की साजिशें रची जा रही हैं और विश्वविद्यालयों की दीवारें जेल की दीवारों में बदल रही हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हमारा पक्का विश्वास है कि यह अंधेरा हमेशा नहीं रहेगा; यह जरूर हटेगा।’ अंजलि ने आगे कहा कि ऐसे मुश्किल दौर में जीवन, संघर्ष और बदलाव की चाहत से जन्मे गीतों का महत्व और बढ़ जाता है।
जो समाज अपने संघर्षों और क्रांतिकारी गीतों को भूल जाता है, वह अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने की क्षमता भी खो देता है। ‘द सॉंग ऑफ़ यूथ’ इन्हीं सपनों, विद्रोह और कभी हार न मानने के संकल्प के साथ युवाओं के बीच आया है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध प्रगतिशील कवियों और शायरों की रचनाओं को संगीत दिया गया। बैंड के कलाकारों ने साहिर लुधियानवी, शंकर शैलेंद्र, शशिप्रकाश, कात्यायनी, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, नाजिम हिकमत और हबीब जालिब की मशहूर कविताओं व नज्मों को संगीतमय रूप में पेश कर दर्शकों को बांधे रखा।
