The meaning of luxury is changing; companies are selling memories and status.

  • Hindi News
  • Business
  • The Meaning Of Luxury Is Changing; Companies Are Selling Memories And Status.

न्यूयॉर्क8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
एलवीएमएच और होटल चेन एकॉर का संयुक्त वेंचर ओरिएंट समुद्र में दो आलीशान यॉट उतार रहा है। फ्रांस, इटली के तटीय इलाकों की चार दिन की यात्रा का शुरुआती किराया 25,000 यूरो है। - Dainik Bhaskar

एलवीएमएच और होटल चेन एकॉर का संयुक्त वेंचर ओरिएंट समुद्र में दो आलीशान यॉट उतार रहा है। फ्रांस, इटली के तटीय इलाकों की चार दिन की यात्रा का शुरुआती किराया 25,000 यूरो है।

एआई बूम से नए बिलियनेयर पैदा हो रहे हैं। इनके लिए लग्जरी के मायने बदल गए हैं। ये महंगी घड़ियां, आर्टवर्क जैसी चीजों से ऊब चुके हैं। इसकी जगह नए अनुभवों की इंडस्ट्री ले रही हैं। तमाम लग्जरी कंपनियां समझ चुकी हैं कि अब मुनाफा सामान बेचने में नहीं, बल्कि यादें, अनुभव और ‘स्टेटस’ बेचने में है।

इस ट्रेंड को भांपते हुए एलवीएमएच और होटल चेन एकॉर का संयुक्त वेंचर ओरिएंट समुद्र में दो आलीशान यॉट उतार रहा है। फ्रांस, इटली के तटीय इलाकों की चार दिन की यात्रा का शुरुआती किराया 25,000 यूरो है।

वीआईपी बैज और सोशल रैंकिंग से स्टेटस दिखाना बना स्टेटस सिंबल

सोच – अकूत दौलत पर सिर्फ विशिष्ट पहचान की चाह

बेहद अमीर लोगों के पास सात घर, 12 कारें और 17 घड़ियां होने के बाद भी एक खास बकेट लिस्ट बची होती है। एकॉर के सीईओ सेबेस्टियन बाजिन के मुताबिक इस स्तर पर पैसे का पारंपरिक मतलब खत्म हो जाता है। तब समाज में सिर्फ अपनी विशिष्ट पहचान बनाना ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।

प्रदर्शन – मोनाको रेस जैसे आयोजनों में रसूख का शो

यह लग्जरी यॉट मुख्य रूप से कान फिल्म फेस्टिवल और मोनाको ग्रां प्री जैसे बड़े वैश्विक आयोजनों को केंद्र बनाएगा। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार इन अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में ग्राहकों को मिलने वाले विशेष वीआईपी बैज ही समाज में उनकी सोशल रैंकिंग और स्टेटस तय करते हैं।

पैसा हो तो ऐसा, जब अरबपतियों के लिए रात में खुलते हैं ‘वैटिकन एंड लौवर’ जैसे म्यूजियम, राजा-रानी संग महल में करते हैं निजी डिनर

अरबपति ग्राहकों के लिए रात के समय सबसे बड़े म्यूजियम जैसे लौवर या वैटिकन खोले जाते हैं। वे आर्ट एक्सपर्ट के साथ इतिहास देखते हैं।

यूरोप के कई ऐतिहासिक महल इन अरबपतियों के लिए खुलते हैं, जहां वे किसी देश के राजा या रानी के साथ प्राइवेट डिनर खरीदते हैं।

कंपनियां पूरा आइलैंड जैसे कैरिबियन द्वीप का बुक करती हैं। पूरा स्टाफ, शेफ, सबमरीन, सुरक्षा तंत्र एक परिवार के लिए काम करता है। हफ्ते का खर्च 30 करोड़ रुपए तक होता है।

अंटार्कटिका या अलास्का जैसे दुर्गम इलाकों में प्राइवेट सुपरयाॉट चार्टर से यात्रा। साथ में हेलीकॉप्टर, आइस-ब्रेकर शिप्स और वैज्ञानिकों की एक टीम होती है जो केवल उस परिवार को गाइड करती है।

ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी, टिकट से पार्किंग तक, एक ग्राहक से बढ़ी कमाई

ग्लोबल एक्सपीरियंस इकोनॉमी अभी करीब 1 ट्रिलियन डॉलर ( 94 लाख करोड़) की है। एक ही विजिटर से टिकट, खाना, ड्रिंक्स, मर्चेंडाइज, तस्वीरें और पार्किंग के जरिए कई गुना कमाई होती है। ब्रिटेन के ‘लैपलैंडयूके’ को ही ले लीजिए। हर साल दिसंबर में इनके 1.6 लाख टिकट कुछ ही घंटों में बिक जाते हैं। 1.3 लाख/व्यक्ति के हिसाब से कंपनी हर सीजन में टिकटों से 188 करोड़ कमाती है।

वे क्यों सफल हैं? क्योंकि ये इवेंट नहीं, बल्कि ‘थिएटर प्रोडक्शन’ करते हैं। वहां कलाकार हमेशा अपने कैरेक्टर में रहते हैं, सेट करीब से देखने पर भी असली लगते हैं, और भीड़ को कड़ाई से कंट्रोल किया जाता है।

इस खेल में मुकाबला बड़े-छोटे ब्रांड्स के बीच नहीं, बल्कि उन कंपनियों के बीच है, जो सोचती हैं कि वे सिर्फ ‘वादे के बिजनेस’ में हैं और डिलीवरी पर खरा उतरना है।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *