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48 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट 28 सितंबर को यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लेने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। सरकार ने 2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस लगाने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी है। याचिका में इस फीस लेने को रद्द करने की मांग की गई है।
CJI सूर्यकांत की तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई
कोर्ट की कॉज लिस्ट के अनुसार, यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने सुनवाई हाेगी। वकील अंजन दत्ता ने ये जनहित याचिका की है।
बिना सलाह और ठोस कानून के फीस लगाने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि सरकार ने जनता से चर्चा किए बिना और कोई ठोस नियम बनाए बिना ही यह फीस तय कर दी। इसके अलावा, ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ के एक नियम (धारा 10A) को भी अदालत में चुनौती दी गई है। आरोप है कि यह नियम सरकार को अपनी मर्जी से यह फैसला करने की छूट देता है कि कौन-सा डिजिटल पेमेंट फ्री रहेगा और किस पर चार्ज लगेगा।

रुपे कार्ड और UPI के नियमों में अंतर पर सवाल
याचिका में रुपे डेबिट कार्ड और UPI के बीच किए गए इस भेदभाव को गलत ठहराया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, सरकार ने रुपे कार्ड से पेमेंट पर ‘जीरो-चार्ज’ की सुविधा जारी रखी है, लेकिन UPI से ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर फीस लगा दी है। इसे मनमाना फैसला बताते हुए कहा गया है कि इससे कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ेगा और आम ग्राहकों की जेब पर भी असर पड़ेगा।
UPI चार्ज के नए नियम: कारोबारियों पर क्या असर पड़ेगा?
- बड़े व्यापारियों पर 0.4% चार्ज: जिन व्यापारियों का महीने का UPI कलेक्शन ₹1 लाख से ज्यादा है, उन्हें ₹2,000 से बड़े हर पेमेंट पर 0.4% MDR और GST देना होगा।
- छोटे व्यापारियों को छूट: जिन दुकानदारों की महीने में UPI से कुल कमाई ₹1 लाख तक है, उनके लिए सभी ट्रांजैक्शन बिल्कुल मुफ्त रहेंगे, भले ही पेमेंट ₹2,000 से ज्यादा का हो।
- कैटेगरी बदलने का नियम: अगर कोई छोटा व्यापारी लगातार 3 महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा का UPI पेमेंट लेता है, तो बैंक उसे बड़े व्यापारियों की लिस्ट में डाल देंगे और फिर उस पर भी चार्ज लागू होगा।
- ₹2,000 तक की बिक्री फ्री: बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 या उससे कम के छोटे पेमेंट्स पर कोई फीस नहीं देनी होगी।
- अधिकतम फीस तय: ₹75,000 या उससे बड़े पेमेंट पर व्यापारी से ज्यादा से ज्यादा ₹300 और GST ही लिया जाएगा।
- लिमिट हर पेमेंट पर लागू: ₹2,000 की सीमा दिन भर की कुल बिक्री पर नहीं, बल्कि हर एक पेमेंट (बिल) पर अलग से देखी जाएगी।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या होता है?
MDR वह फीस है, जो कोई दुकानदार या व्यापारी कार्ड या UPI से पेमेंट लेने की सुविधा इस्तेमाल करने के बदले बैंक और पेमेंट कंपनियों को देता है।
यह चार्ज पेमेंट सिस्टम और मशीनों को सही तरीके से चलाने के खर्च के लिए लिया जाता है। खास बात यह है कि यह फीस व्यापारी को देनी होती है, ग्राहक से नहीं ली जाती।
