श्रावस्ती2 मिनट पहले
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श्रावस्ती में भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा सर्वेक्षण टीम-3 की पहली अंतर्राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्रावस्ती अश्विनी कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में हुई। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच सीमा स्तंभों के सर्वेक्षण, पुनर्स्थापना और मरम्मत से संबंधित कार्यों की समीक्षा और समन्वय को मजबूत करना था।
बैठक में भारत-नेपाल की संयुक्त सर्वेक्षण टीम-3 के तहत उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें बलरामपुर के जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन के साथ बहराइच, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जनपदों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

नेपाल की ओर से बर्दिया, बांके, दांग (रुपईडीहा क्षेत्र), कपिलवस्तु और नवलपरासी के मुख्य जिलाधिकारियों ने भी इस बैठक में भाग लिया। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 62वीं, 42वीं, 59वीं, 9वीं, 50वीं, 43वीं, 22वीं और 70वीं बटालियन के कमांडेंट भी उपस्थित थे।
नेपाल के संबंधित पुलिस अधीक्षक भी बैठक में शामिल हुए। दोनों देशों के वरिष्ठ वन और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। श्रावस्ती के जिलाधिकारी ने बर्दिया के जिलाधिकारी और नेपाल टीम लीडर गोगन बहादुर हमल का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। बैठक में भाग लेने वाले सभी अधिकारियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

बैठक के दौरान बताया गया कि भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा उत्तर प्रदेश के बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जनपदों से होकर गुजरती है। इन क्षेत्रों में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय सीमा स्तंभों का पुनर्स्थापन, मरम्मत और सत्यापन उत्तर प्रदेश भू-स्थानिक निदेशालय, लखनऊ और संयुक्त सर्वेक्षण टीम द्वारा किया जाता है।
शासन ने श्रावस्ती के जिलाधिकारी को टीम-3 का नोडल अधिकारी और टीम लीडर नियुक्त किया है। वे अपने पर्यवेक्षण में इन कार्यों को पूरा कराएंगे। बैठक में श्रावस्ती के मुख्य विकास अधिकारी शाहिद अहमद, एसएसबी 62वीं वाहिनी के कमांडेंट अमरेन्द्र कुमार वरुण, बहराइच के मुख्य राजस्व अधिकारी देवेंद्र पाल सिंह और श्रावस्ती के प्रभागीय वनाधिकारी धनराज मीणा मौजूद थे।
इसके अतिरिक्त, महाराजगंज के उपजिलाधिकारी नवीन प्रसाद, सिद्धार्थनगर के उपजिलाधिकारी कर्मेन्द्र कुमार सहित विभिन्न बटालियनों के कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह बैठक भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन और आपसी समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक पहल है।
