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422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना का समझौता ज्ञापन (MOU) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भारत सरकार और साझेदार राज्यों के बीच जल्द हस्ताक्षरित होगा। MOU पर हस्ताक्षर से पहले केंद्र ने इसका प्रारूप परियोजना से जुड़े सभी राज्यों को भेजकर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसी सिलसिले में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी मंगलवार को एमओयू के प्रारूप की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के क्रियान्वयन में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में हुई बैठक में 422 मेगावाट किशाऊ परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति बनी है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना में कोई वित्तीय निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को हर वर्ष लगभग 600 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पूर्व में तैयार एमओयू के प्रारूप को अस्वीकार कर प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखने वाली नई शर्तों और प्रावधानों को सभी हितधारकों से मंजूरी दिलाई। इससे राज्य के दीर्घकालिक हित सुरक्षित हुए और परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता भी साफ हुआ। हरियाणा-दिल्ली-राजस्थान उठाएंगे बिजली कंपोनेंट खर्च मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी साझेदार राज्यों (हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान) को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा। वहीं हिमाचल को अपनी जरूरत के अनुसार जलाशय से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर पानी पर अपना अधिकार भी सुरक्षित किया है। बीबीएमबी के बकाया वसूली के प्रयास तेज: CM सुक्खू ने कहा कि किशाऊ परियोजना पर हुआ यह समझौता हिमाचल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे राज्य का वैध हिस्सा और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होंगे। राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं से हिमाचल को मिलने वाली 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये की वसूली के प्रयास भी तेज कर रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद यह मामला करीब 15 वर्षों से लंबित है। आठ साल से चला आ रहा गतिरोध समाप्त मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से किशाऊ परियोजना में हिमाचल के वित्तीय योगदान को लेकर पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हुआ है। इससे राज्य पर पड़ने वाला भारी वित्तीय बोझ टल गया। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसका विरोध करते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की, जिसके तहत हिमाचल को परियोजना में कोई पूंजीगत निवेश नहीं करना होगा और राज्य को उसके सभी वैध लाभ मिलते रहेंगे। सीएम के अलावा ये अधिकारी रहे मौजूद मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम, प्रधान सचिव देवेश कुमार और हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक उपस्थित रहे। मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
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PM की मौजूदगी में किशाऊ परियोजना का MOU जल्द:हिमाचल CM ने हाई पावर कमेटी की मीटिंग ली; कहा-बिना निवेश 600 करोड़ की होगी कमाई