NGT Summons NMCG Director Over Asi River Tapping Controversy

असि नदी की टैपिंग पर NGT सख्त। NMCG के महानिदेशक 13 अक्टूबर को तलब।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने वाराणसी की पौराणिक असि नदी की टैपिंग और उसे नाले के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) से पूछा है कि गंगा की सहायक नदी की टैपिंग की अनुमति राज्य सरकार को किस आधा

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एनजीटी को एनएमसीजी की ओर से जवाब दिया गया, लेकिन उससे असंतुष्ट अधिकरण ने मिशन के महानिदेशक को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। यह आदेश असि और वरुणा नदियों के जीर्णोद्धार की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

5 फरवरी को पहली बार उठा था मामला

याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि इस मामले में पहली सुनवाई 5 फरवरी को हुई थी। उस दौरान भी एनजीटी ने असि नदी की टैपिंग पर आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था। राज्य सरकार ने बताया था कि टैपिंग की अनुमति राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने दी है। इसके बाद अधिकरण ने मिशन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी, जिस पर बुधवार को नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान एनएमसीजी की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि अस्थायी रूप से असि नदी की टैपिंग की गई है, ताकि गंगा नदी में अपशिष्ट जल का प्रवाह रोका जा सके। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर यह अनुमति दी गई थी।

हालांकि, एनजीटी की खंडपीठ इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण के लिए एनएमसीजी के महानिदेशक को 13 अक्टूबर को तलब कर लिया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की खंडपीठ ने कहा कि गंगा नदी प्राधिकरण आदेश-2016 के अनुसार असि नदी, गंगा का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में उसकी टैपिंग नदी की प्राकृतिक धारा में सीधा हस्तक्षेप है और यह सर्वोच्च न्यायालय के कमलनाथ मामले में प्रतिपादित सिद्धांतों की भावना के भी विपरीत प्रतीत होता है।

‘असि-वरुणा से पड़ा वाराणसी का नाम’

विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने सुनवाई के दौरान कहा कि वाराणसी का नामकरण ही पौराणिक असि और वरुणा नदियों के नाम पर हुआ है। ऐसे में इतनी महत्वपूर्ण नदी के साथ इस प्रकार का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है।

अब इस मामले में एनजीटी ने अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है, जब राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक को अधिकरण के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

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