Mukul Dahiya Doping Controversy | Asian Games Medal Hope Banned

6 मिनट पहले

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भारत के एशियन गेम्स अभियान को झटका लगा है। 86 किलो वर्ग के फ्रीस्टाइल पहलवान मुकुल दहिया को NADA ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।

दहिया कुछ ही हफ्तों बाद जापान में होने वाले एशियन गेम्स से पहले मेफेंटरमाइन स्टिमुलेंट के टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। वे इस वर्ग में भारत के मजबूत पदक दावेदार माने जा रहे थे।

2026 एशियन गेम्स 19 सितंबर से शुरू होने हैं। भारतीय दल के पास इस मामले से निपटने के लिए अब बहुत कम समय बचा है। दहिया इस समय आर्मेनिया के येरेवान में हैं, जहां भारत के एशियन गेम्स के लिए चुने गए फ्रीस्टाइल पहलवान एक्सपोजर कैंप में शामिल हैं।

एशियन चैंपियनशिप में जीता था सिल्वर

दहिया ने 2026 एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर 86 किलो वर्ग में भारत के उभरते पहलवान के रूप में पहचान बनाई थी। उनके निलंबन के बाद एशियन गेम्स में हिस्सा लेना मुश्किल हो गया है और भारत इस वर्ग में बिना पहलवान के उतर सकता है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को दहिया के निलंबन की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। फेडरेशन एशियन गेम्स के लिए अपनी अंतिम टीम पहले ही भेज चुका था, इसलिए विकल्प पर विचार करने के लिए उसके पास बहुत कम समय बचा है।

दीपांशु के बाद कुश्ती में दूसरा डोपिंग मामला

दहिया का मामला एशियन गेम्स के लिए चुने गए एक और पहलवान के निलंबन के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। ग्रीको-रोमन पहलवान दीपांशु को 130 किलो वर्ग में प्रतियोगिता से बाहर कराए गए टेस्ट के बाद अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था।

उस मामले में WFI ने दीपांशु की जगह रोनक दहिया को टीम में शामिल कर दिया था। रोनक ने 31 मई को लखनऊ में हुए चयन ट्रायल्स में दीपांशु के बाद दूसरा स्थान हासिल किया था।

हालांकि, इस बार फेडरेशन के पास कार्रवाई करने की गुंजाइश काफी कम दिखाई दे रही है।

अगस्त 4 को अपडेटेड सूची से मिली जानकारी

WFI ने चुने गए पहलवानों की अंतिम सूची जून के पहले हफ्ते में इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन को भेज दी थी। ऐसे में 86 किलो वर्ग की एंट्री में आखिरी समय पर बदलाव करना मुश्किल दिख रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरेशन को दहिया के अस्थायी निलंबन का पता तब चला, जब 4 अगस्त को अपडेटेड NADA सस्पेंशन लिस्ट में उनका नाम दिखाई दिया। दीपांशु के मामले के उलट WFI को इतनी जल्दी जानकारी नहीं मिली कि वह उनकी जगह किसी पहलवान को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर सके।

दीपांशु के मामले में फेडरेशन को करीब 20 जुलाई को जानकारी दे दी गई थी। इससे उसे समयसीमा से पहले जरूरी बदलाव करने का मौका मिल गया था।

दहिया के मामले में देरी से मिली जानकारी का भारत की पदक संभावनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो भारत एशियन गेम्स में पुरुषों के 86 किलो फ्रीस्टाइल वर्ग में बिना प्रतिनिधित्व के उतर सकता है।

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