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गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पुलिस अधिकारियों के लिए साइबर फॉरेंसिक पर एक सप्ताह का स्पेशल ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम 4 से 8 मई तक आयोजित किया जा रहा है। इसे विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग द्वारा गोरखपुर जोन पुलिस के साथ हुए समझौते (एमओयू) के तहत, साइंट टेक्नोलॉजीज, नई दिल्ली के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन एएसपी दिनेश गोदारा ने किया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए पुलिस अधिकारियों के लिए तकनीकी जानकारी और कौशल बेहद जरूरी हो गए हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उनकी जांच क्षमता को मजबूत बनाने में काफी मदद करते हैं। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को साइबर फॉरेंसिक टूल्स, जांच के आधुनिक तरीके, डिजिटल साक्ष्यों के प्रबंधन और कानूनी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी देना है, ताकि वे वास्तविक मामलों में इनका सही उपयोग कर सकें। इस कार्यक्रम में गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर जिलों से कुल 25 पुलिस अधिकारी भाग ले रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने बताया कि आजकल डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड, साइबर स्टॉकिंग और पहचान चोरी जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इनसे निपटने में साइबर फॉरेंसिक्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. बी. के. शर्मा और डॉ. विमल कुमार हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मोबाइल, कंप्यूटर और नेटवर्क फॉरेंसिक्स के साथ-साथ मल्टीमीडिया विश्लेषण, ड्रोन और वीडियो फॉरेंसिक्स, वॉयस एनालिटिक्स, स्टेगनोग्राफी और पासवर्ड विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही, विशेषज्ञ नवीन सिंह और मणि भारती प्रतिभागियों को डिस्क और मोबाइल फॉरेंसिक्स, ऑडियो व वीडियो विश्लेषण, मैलवेयर जांच, ड्रोन फॉरेंसिक्स, सोशल मीडिया जांच, एन्क्रिप्टेड डेटा एनालिसिस, क्रिप्टोकरेंसी ट्रैकिंग और कोर्ट में उपयोग होने वाली रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी देंगे।
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MMMUT में पुलिस के लिए साइबर फॉरेंसिक ट्रेनिंग शुरू:आधुनिकता पर जोर, 4 जिलों से 25 पुलिस अधिकारी ले रहे ट्रेनिंग