KGMU Lucknow AI Chatbot Appointment

KGMU में मरीजों को अपॉइंटमेंट अब AI चैटबॉट से मिलेगा।इसके लिए डेडिकेटेड AI सेगमेंट डेवलप किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर दिग्गज AI एक्सपर्ट की एडवाइस भी ली जाएगी। ये पहल शुरू करने वाला KGMU उत्तर भारत का पहला चिकित्सा संस्थान होगा।

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इसका मकसद मरीज-तीमारदारों को इलाज संबंधी सुविधाओं की आसानी से जानकारी मुहैया कराना होगा। साथ ही मरीजों की दुश्वारियों को दूर करने के लिए KGMU प्रशासन AI इनेबल्ड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करेगा।

ये कहना है KGMU कुलपति डॉ.सोनिया नित्यानंद का। अपने दूसरे कार्यकाल के लिए भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दिया है। चैटबॉट के जरिए मरीज मोबाइल, वेबसाइट या अस्पताल के ऐप से घर बैठे कई जरूरी जानकारियां हासिल कर सकेंगे।

डॉक्टर को दिखाने में होगी आसानी

डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि चैटबॉट मरीजों का डिजिटल मददगार होगा। मरीज इसमें अपनी समस्या या जरूरत से जुड़ा सवाल पूछ सकेंगे। मसलन किस बीमारी के लिए किस विभाग में जाना है, कौन से डॉक्टर को दिखाना है? डॉक्टर को दिखाने का समय कब मिलेगा। इसकी जानकारी चैटबॉट से ली जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर इसी माध्यम से डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट लेने की सुविधा भी दी जाएगी।

इनके लिए होगा बेहद फायदेमंद

कुलपति ने बताया कि दूर-दराज से KGMU आने वाले मरीजों और तीमारदारों को अक्सर विभाग खोजने में परेशानी होती है। चैटबॉट उन्हें ओपीडी, लैब, एक्स-रे, एमआरआई, इमरजेंसी और फार्मेसी का स्थान बताएगा। इसके अलावा संबंधित विभाग के ओपीडी समय और डॉक्टर की उपलब्धता की जानकारी भी मिल सकेगी। इससे मरीजों का समय बचेगा और अस्पताल में अनावश्यक भीड़ भी कम करने में मदद मिलेगी।

एक साल में तैयार होगा ट्रॉमा-2

KGMU का ट्रॉमा-2 अप्रैल 2027 तक तैयार हो जाएगा। 500 बेड के इस नए ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने से मौजूदा ट्रॉमा-1 पर मरीजों का दबाव कम होगा। इसके संचालन के लिए केजीएमयू प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। डॉक्टर, रेजिडेंट, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल और अन्य श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती का खाका तैयार किया गया है। जल्द ही प्रस्ताव को मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।

कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि KGMU में ट्रॉमा-2 का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसके निर्माण समेत अन्य कार्यों पर करीब 275 करोड़ रुपये खर्च होंगे। निर्माण पूरा होने के बाद इसमें 500 बेड पर गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। नए सेंटर में पर्याप्त मानव संसाधन की तैनाती के लिए प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। ताकि भवन तैयार होने के बाद मरीजों को इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े।

400 बेड पर 500 से ज्यादा मरीजों का बोझ

वर्तमान में ट्रॉमा-1 में मरीजों का अत्यधिक दबाव है। करीब 400 बेड की क्षमता वाले ट्रॉमा सेंटर में कई बार 500 से ज्यादा मरीज भर्ती रहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। 100 से ज्यादा मरीजों को स्ट्रेचर पर इलाज कराना पड़ता है। गंभीर मरीजों की अधिक संख्या के कारण डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ पर भी काम का दबाव बना रहता है। ऐसे में ट्रॉमा-2 के शुरू होने से गंभीर मरीजों को समय पर बेड मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। मरीजों को स्ट्रेचर पर इलाज कराने की मजबूरी भी काफी हद तक कम हो सकेगी। दोनों ट्रॉमा सेंटरों में मरीजों का दबाव बांटे जाने से इलाज की व्यवस्था बेहतर करने में मदद मिलेगी।

1750 डॉक्टर-कर्मचारियों की होगी भर्ती

कुलपति ने बताया कि ट्रॉमा-2 के संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों की जरूरत का आकलन किया जा चुका है। इसमें डॉक्टरों के साथ रेजिडेंट, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारी शामिल होंगे। करीब 1750 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

गंभीर मरीजों को मिलेगा सहारा

प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में सड़क हादसों, गंभीर चोट और अन्य आपात स्थिति वाले मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। नए 500 बेड के ट्रॉमा-2 के शुरू होने से ऐसे मरीजों के लिए इलाज की क्षमता बढ़ जाएगी। मरीजों को बेड के लिए भटकने और स्ट्रेचर पर लंबे समय तक इंतजार करने से राहत मिलने की उम्मीद है। अप्रैल 2027 तक निर्माण पूरा होने के बाद ट्रॉमा-2 के संचालन से केजीएमयू की ट्रॉमा सेवाओं को भी विस्तार मिलेगा।

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