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KGMU में फर्जी मरीज करोड़ों रुपए की दवा डकार गए। कैंसर से लेकर किडनी तक के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाएं असाध्य योजना से खरीदी गई। फिर उन दवाओं को बाजार में खपा दिया। हालांकि, दवाएं कहां बेची या खपाई गईं, उसकी पड़ताल जारी है। जांच कमेटी ने असाध्य योजना में सेंधमारी कर करोड़ों की दवा घोटाला करने वाले चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की है। आज यानी मंगलवार को तीन संविदा और एक नियमित फार्मासिस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। KGMU यूरोलॉजी विभाग में पिछले साल हर महीने असाध्य योजना में पंजीकत मरीज के लिए डॉक्टर की सलाह पर करीब 10 लाख रुपए की दवाएं क्रय की जाती थीं। ताकि, गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया जा सके। इस साल की शुरुआत में इसी योजना के तहत क्रय की जाने वाली दवाओं का बजट अचानक तीन से चार गुना तक बढ़ गया। पिछले माह करीब 45 लाख की दवा क्रय की गई। अचानक महंगी दवाओं की खपत बढ़ने पर KGMU प्रशासन का माथा ठनका। अधिकारियों ने जिन मरीजों के नाम पर दवाएं मंगाई गईं। उनके इलाज संबंधी दस्तावेज जुटाने शुरू किए। दस्तावेजों की शुरुआती पड़ताल में बड़े घोटाले की आशंका हुई। फिर अफसरों ने कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद को घपले की जानकारी दी। कमेटी को जांच में मिली ढेरों खामियां कुलपति ने मामले की जांच के लिए डीन पैरामेडिकल डॉ. केके सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बना दी। कमेटी में न्यरोलॉजी विभाग की उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्वेता पांडेय, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. दुर्गेश और वित्त नियंत्रक संतोष शर्मा भी शामिल हैं। कमेटी को जांच में ढेरों खामियां मिली। घोटालेबाजों ने असाध्य योजना में करीब ढाई करोड़ रुपए की दवाओं का घालमेल किया है। मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश कमेटी ने की प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि कमेटी ने जांच और पड़ताल के बाद यूरोलॉजी विभाग के एक नियमित फार्मासिस्ट और तीन संविदा कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की है। मंगलवार को मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ये है दवाओं की घपलेबाजी का चक्रव्यूह
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KGMU दवा घोटाले में 4 पर होगी FIR:फर्जी मरीजों के नाम पर खरीदीं महंगी दवाएं, यूरोलॉजी विभाग में 3.5 करोड़ का दवा घोटाला