“बेटे-बहू के कमरे में सांप का एक जोड़ा निकला। घरवालों ने एक को मार डाला। दूसरा सांप 3 दिन बाद काल बनकर आया। उसने पहले 4 साल की पोती को डसा। फिर 6 साल के पोते को भी डस लिया। इलाज के दौरान पोते की मौत हो गई।
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पोती के भी मुंह से झाग निकल रहा था। न हाथ-पैर में हरकत थी और न ही आंखें खोल रही थी। हम मान चुके थे कि हमने पोती को भी खो दिया। शव दफनाने के लिए दो कब्र भी खोद ली थीं। लेकिन अचानक भगवान की कृपा हुई। पोती की सांस लौट आई।”
ये कहते हुए झांसी की रहने वाली लाड़कुंवर की आंखें नम हो गईं। 2 अगस्त को सोते समय सांप के डसने से उनके 6 साल के पोते मयंक की मौत हो गई थी। चार साल की मासूम पोती प्रगति 12 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही।
14 अगस्त को अस्पताल से डिस्चार्ज होकर वह घर पहुंची। जहां मां नेहा कुशवाहा ने उसे सीने से लगा लिया। बोली- मैंने अपना इकलौता बेटा खो दिया। इकलौती बेटी को दूसरा जीवन मिला है। घटना शहर से करीब 20 किमी दूर बड़ागांव कस्बे की है। विस्तार से जानिए पूरा मामला…
2 तस्वीरें देखिए-

तस्वीर 2 अगस्त की है, प्रगति के अंगूठे में सांप के डसने का निशान है। वह 13 दिन अस्पताल में भर्ती रही।

तस्वीर 14 अगस्त की है, प्रगति 13वें दिन अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंची। अभी बच्ची गुमशुम है।
पहली बार स्कूल गया था मयंक
बड़ागांव के हरदौलपुरा मोहल्ले में बलराम कुशवाहा परिवार के साथ रहते हैं। घर में पत्नी, दो बेटे मुकेश (35), प्रदीप (27), बहुओं और पोते-पोतियां हैं। बेटी सपना (30) शादी के बाद से अपने ससुराल कैना गांव में रहती है। घर के सामने ही दो बीघा खेत है।
बलराम और बड़ा बेटा खेती-किसानी करते हैं, जबकि छोटा बेटा प्रदीप एपेक्स फैक्ट्री में नौकरी करता है। मुकेश, पत्नी और दो बच्चों के साथ घर के पिछले हिस्से में रहते हैं। प्रदीप, पत्नी नेहा और बच्चों के साथ घर के आगे वाले हिस्से में रहते हैं।
नेहा कुशवाहा ने बताया- अप्रैल में ही मयंक का LKG में एडमिशन कराया था। बेटी प्रगति भी कभी-कभी उसके साथ स्कूल चली जाती थी। पूरा परिवार दोनों बच्चों से बहुत प्यार करता था, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था।

पिता के ड्यूटी जाने के बाद सांप ने डसा
नेहा ने बताया- 2 अगस्त तड़के करीब 3 बजे मेरे पति प्रदीप काम पर चले गए। मैं भी कमरे के अंदर बेड पर दोनों बच्चों के साथ सो गई। पता नहीं सांप कब बिस्तर पर आ गया। उसने पहले 4 साल की बेटी प्रगति को डसा तो वो जोर-जोर से रोने लगी।
मुझे लगा कि उसने खुद से अपने अंगूठे में काट लिया। क्योंकि, वो सोते समय पहले भी ऐसा कर चुकी थी। बेटी अपनी दादी के पास जाने की जिद करने लगी। मैं उसे उठाकर दादी को दे आई। आकर 6 साल के बेटे मयंक के साथ लेट गई। तब बेटे को भी सांप ने डस लिया। उसे 3 जगह काट लिया। बेटा तो हमें छोड़कर चला गया, लेकिन बेटी भगवान की कृपा से बच गई।

इसी सांप ने प्रगति और मयंक को डसा था। ये करैत सांप दुनिया का चौथा सबसे जहरीला है।
पोती ने 3 दिन बाद अस्पताल में हाथ हिलाया, तब कब्र में मिट्टी भर दी
दादी लाड़कुंवर ने बताया- हम लोगों को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि पोती बच पाएगी। जब उसे मंदिर ले गए तो उसने आंखें बंद कर ली थी और मुंह से झाग आ गया था। वो बेहोश हो चुकी थी, जबकि पोता मयंक बोलते हुए मेडिकल कॉलेज तक गया।
अपना वजन करने के लिए भी खड़ा हो गया था। मयंक के बचने की उम्मीद लग रही थी, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। तब लगा था कि दोनों बच्चे खत्म हो गए। इसलिए शवों को दफनाने के लिए दो कब्र भी खोद ली थीं।
डॉक्टर ने कहा कि प्रगति की अभी सांस चल रही है। उन्होंने वेंटीलेटर हटाकर भी दिखाया। तब 2 अगस्त की शाम को मयंक के शव को दफना दिया। तीन दिन बाद पोती ने हाथ हिलाया और फिर आंख खोली। तब उम्मीद जगी और मिट्टी डालकर कब्र को बंद कर दिया।

विधायक की बात मानी, इसलिए बची भतीजी
बच्ची के परिवार के ताऊ हरदयाल कुशवाहा ने बताया- बच्ची को देखकर ये लग रहा था कि बच्चे के साथ बच्ची को भी हमने खो दिया है। लेकिन, विधायक राजीव पारीछा ने बहुत मदद की। जब मेडिकल कॉलेज से बच्ची को ग्वालियर ले जा रहे थे। तब विधायक से बात हुई तो उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल भेज दिया।
उन्होंने ही डॉक्टर को कॉल करके बच्ची को भर्ती कराया। तीन दिन बाद उसने हरकत की। भगवान की मेहरबानी से बच गई। अब वह बोल रही है। खाने-पीने भी लगी है। विधायक ने ही इलाज का पूरा खर्चा उठाया है। वो घर पर भी आए थे। इसके बाद अस्पताल में जाकर डॉक्टर से मिले। बच्ची से भी मिले।

ये कब्र की तस्वीर है। जिस पर लकड़ी रखी है, उसमें मयंक का शव दफनाया गया। पास में दूसरी कब्र खोदी गई थी, जिस पर अब मिट्टी डाल दी गई है।
दोबारा दिखा सांप तो सपेरे से पकड़वाया
दादी लाड़कुंवर ने बताया- दोनों बच्चों को डसने के बाद सांप कमरे से बाहर आया और नाले के पास एक बिल में छिप गया था। तब हमने बिल और उसके आसपास सीमेंट की छाप कर दी। लेकिन, कुछ दिनों बाद दोबारा सांप नजर आया। तब घरवाले औपारा गांव से सपेरे को बुलाकर लाए। करीब 5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सपेरे ने सांप को पकड़ लिया। सपेरे ने बताया कि ये करैत सांप है। जो दुनिया का चौथा सबसे जहरीला है।

डॉक्टर ने कहा- जहर प्रगति के पूरे शरीर में फैल चुका
प्रगति का इलाज कर रहे डॉ. मनदीप ने बताया- सांप के डसने के बाद जहर बच्ची के पूरे शरीर में फैल चुका था। एक सांप को मारने के बाद दूसरे सांप के काटने को ‘बदला’ मानना केवल भ्रम है। संभव है कि वहां पहले से ही दो सांप मौजूद रहे हों, जिनमें से एक पर परिवार की नजर नहीं पड़ी हो। उन्होंने बताया कि करीब 70% सांप जहरीले नहीं होते, 30% सांप ही जहरीले होते हैं।

जहरीला सांप काट ले तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाएं
डॉ. मनदीप ने लोगों से अपील की है कि अगर जहरीला सांप काट ले तो बिना समय गंवाए मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल ले जाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो। उन्होंने कहा- जहरीले सांप के काटने का यही प्रभावी इलाज है। झाड़-फूंक या तांत्रिकों के चक्कर में पड़ने से इलाज में देरी होती है। अधिकांश मामलों में यही देरी जानलेवा साबित होती है।
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