India Launches First AI Satellite

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हैदराबाद3 मिनट पहले

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भारत ने अब ऐसा पहला सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज दिया है, जो सिर्फ तस्वीरें खींचकर धरती पर नहीं भेजेगा, बल्कि तस्वीरों को समझने का काम भी अंतरिक्ष में ही करेगा। हैदराबाद की कंपनी ‘टेकमीटस्पेस’ का ‘एमओआई-1पी’ सैटेलाइट एक्सपोसैट-18 मिशन से रात 11:48 बजे लॉन्च किया गया। कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला ‘ऑर्बिटल कंप्यूटिंग’ सैटेलाइट है।

कंपनी के सीईओ रौनक कुमार सामंतराय ने बताया कि एआई गैर-जरूरी डेटा हटाकर केवल काम की जानकारी भेज सकता है। मान लीजिए किसी उपग्रह ने 300 जीबी का आंकड़ा जुटाया, लेकिन ग्राहक को 5 जीबी की जरूरत है तो वह उसे चुनी हुई जानकारी ही भेज सकेगा। यह डेटा कुछ किलोबाइट में भी रह सकता है।

खेती, खनन, बीमा, आपदा प्रबंधन या निगरानी में तेजी

इससे खेती, खनन, बीमा, आपदा प्रबंधन और सीमा या जमीन की निगरानी जैसे कामों में तेजी आ सकती है। मसलन, अगर किसी इलाके में बाढ़ आई है तो सैटेलाइट उसकी तस्वीर लेकर यह पहचान सकता है कि पानी कितने इलाकों में फैला है। इसके बाद पूरी तस्वीर धरती पर भेजने के बजाय सिर्फ जरूरी जानकारी भेजी जा सकती है।

देश को इससे क्या होगा फायदा

समय की बचत: तस्वीर धरती पर आएगी, फिर विश्लेषण होगा, इसके बजाय जरूरी जानकारी अंतरिक्ष में ही तैयार हो जाएगी।

दूसरा फायदा: डेटा भेजने का खर्च और दबाव कम होगा।

सैटेलाइट में ऐसा क्या है खास

एमओआई-1पी का वजन 50 किलो से कम है और इसमें 117 टेराफ्लॉप तक की कंप्यूटिंग क्षमता वाला सिस्टम है। दुनिया में केन्यूटेक के एनएक्स कंप्यूटर की मदद से सैटेलाइट अंतरिक्ष में ही एआई मॉडल चला सकेगा।

कंपनी के अनुसार उसकी ऑर्बिटल लैब ग्राहकों को अपने एआई मॉडल सैटेलाइट पर चलाने की सुविधा भी देगी। कंपनी के मुताबिक 23 ग्राहक इस मिशन से जुड़े हैं।

2028 में अंतरिक्ष में होगा डेटा सेंटर

कंपनी ने 2028 के लिए बड़े डेटा केंद्र की योजना भी बनाई है। इसके तहत ज्यादा क्षमता वाले 100-100 किलो के उपग्रह भेजे जाएंगे। हर उपग्रह में बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर और करीब 100 टेराबाइट स्टोरेज रखने की योजना है। इन उपग्रहों को जोड़कर अंतरिक्ष में ही डेटा एनालिसिस की सुविधा देने का लक्ष्य है।

भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश

अमेरिका, यूरोपीय संघ (ईएसए) और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बनने जा रहा है, जिसके पास अंतरिक्ष में ही डेटा और तस्वीरों का एआई विश्लेषण (ऑर्बिटल कंप्यूटिंग) करने की क्षमता होगी।

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