मेडिकल के बाद आरोपी गुरप्रीत सिंह को व्हील चेयर ले जाती हुई पुलिस। फाइल फोटो
बठिंडा में बम बनाने की कोशिश से शुरू हुआ मामला अब आतंकी नेटवर्क से जुड़ने तक पहुंच गया। 11 सितंबर 2025 को विस्फोटक तैयार करते समय बाप-बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस केस के बाद NIA ने जांच संभाली तो कई खुलासे हुए।
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NIA ने बेटा गुरप्रीत के ऑनलाइन कट्टरपंथ, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ाव, इंटरनेट गतिविधियों और फंड जुटाने से जुड़े सबूत सामने आने का दावा किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह आतंकी मसूद अजहर के भाषणों से प्रभावित था।
NIA ने मार्च 2026 में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद आरोपी ने खुद को आरोपों से मुक्त करने की मांग की, लेकिन अब मोहाली की विशेष NIA कोर्ट ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर अब UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत ट्रायल चलेगा। आरोपी के वकील की ओर से दी गई दलीलें कोई में नहीं टिक पाईं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

आरोपी गुरप्रीत सिंह को पुलिस ले जाते हुए । फाइल फोटो
अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला….
बम बनाते समय पिता-पुत्र घायल: पुलिस के अनुसार, जगतार सिंह के बेटे गुरप्रीत सिंह ने बम बनाने की तैयारी के दौरान विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया था। 11 सितंबर 2025 को इसी दौरान विस्फोट हो गया। इसमें गुरप्रीत सिंह और उसके पिता जगतार सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी दिन थाना नेहियांवाला, बठिंडा में FIR नंबर 198 दर्ज की गई। इसमें बिना सुरक्षा के विस्फोटक या आग पकड़ने वाला सामान रखने के आरोप में धारा 287 और 288 लगाई गई। विस्फोटक या आग से संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप में धारा 326(f) लगाई गई। इसके अलावा बम या विस्फोटक बनाने, सप्लाई करने या अपने पास रखने के आरोप में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत केस दर्ज किया गया।
ऑनलाइन माध्यम से कट्टरपंथ की ओर बढ़ा: जांच के अनुसार, गुरप्रीत सिंह 2023 से 2025 के बीच ऑनलाइन माध्यम से कट्टरपंथ की ओर बढ़ा। वह आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियों से जुड़ा और उसके प्रमुख आतंकी मसूद अजहर के भाषणों से प्रभावित हुआ।
नए सिरे से केस दर्ज, NIA ने जांच की: जांच में सामने आया कि दिसंबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच वह कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों की तैयारी में शामिल रहा। इसमें इंटरनेट पर गतिविधियां करना और पैसों का इंतजाम करना शामिल था। 28 अक्टूबर 2025 को यह मामला नए सिरे से दर्ज किया गया और इसकी जांच NIA ने अपने हाथ में ले ली।
NIA ने चार्जशीट में सबूत रखे: जांच पूरी होने के बाद NIA ने 16 मार्च 2026 को मोहाली की विशेष NIA अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसमें गवाहों के बयान, डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों से मिले सबूत शामिल किए गए। चार्जशीट में आरोपी के कट्टरपंथ की ओर बढ़ने, पैसे जुटाने, इंटरनेट पर की गई गतिविधियों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से मिली जानकारी भी दर्ज की गई।
आरोपी ने कहा- मेरे खिलाफ ठोस सबूत नहीं: चार्जशीट दाखिल होने के बाद गुरप्रीत सिंह ने 1 जून 2026 को अदालत में खुद को मामले से आरोपमुक्त करने की अर्जी दी। उसके वकील ने कहा कि गुरप्रीत सिंह के खिलाफ आतंकी गतिविधियों या किसी साजिश में शामिल होने का कोई ठोस मामला नहीं बनता। वकील ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है।
कोर्ट ने अर्जी खारिज की, आरोप तय करने के निर्देश: 21 अगस्त को मोहाली की विशेष NIA अदालत के न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुरप्रीत सिंह की आरोपमुक्त करने की अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आरोपी के खिलाफ विस्फोटक बनाने और आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने के पर्याप्त प्रथम दृष्टया सबूत हैं।
कोर्ट ने गुरप्रीत सिंह के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 तथा UAPA की धारा 18, 23(1) और 38 के तहत आरोप तय करने के निर्देश दिए। चार्जशीट में आरोपी के ऑनलाइन कट्टरपंथ, इंटरनेट पर गतिविधियों, पैसों के इंतजाम और CDR से जुड़ी जानकारी दर्ज है। अदालत ने माना कि इन सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बनता है।

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