लंदन3 मिनट पहले
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गंगा आरती के दौरान दिए जलाए गए, लेकिन नदी में कोई दीया नहीं बहाया गया।
लंदन में रविवार को पहली बार थेम्स नदी के किनारे गंगा आरती का आयोजन हुआ। इस आरती के सभी टिकट बिक गए और इसमें हजारों लोग शामिल हुए थे।
चिन्मय मिशन UK ने टोटली थेम्स फेस्टिवल के साथ मिलकर यह आयोजन किया। यह चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने के मौके पर हो रहे कार्यक्रमों का हिस्सा था। आरती के जरिए नदी, प्रकृति और जीवन के लिए आभार जताया गया।
फीडबैक को देखते हुए थेम्स नदी के किनारे आरती हर साल आयोजित किया जा सकता है।

थेम्स नदी के किनारे हुई गंगा आरती में हिन्दु समुदाय समेत कई लोग शामिल हुए।
भजन, मंत्र और दीपों के साथ हुई आरती
कार्यक्रम में भजन, मंत्रोच्चार और संगीत प्रस्तुतियां हुईं। बड़ी संख्या में लोगों ने आरती में हिस्सा लिया और दिए जलाकर नदी के लिए सम्मान जताया।
चिन्मय मिशन UK की रेजिडेंट टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा कि पीढ़ियों से लोग गंगा के किनारे नदी, प्रकृति और जीवन के लिए सम्मान जताने के लिए दिए जलाते हैं। थेम्स पर हुई यह आरती इसी भावना को लंदन तक पहुंचाने की कोशिश है।

गंगा आरती से पहले कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है। मिशन के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना जीवन लगा दिया था। चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने के मौके पर यह आयोजन उनकी इसी विरासत को याद करने का एक तरीका था।
आरती हुई, लेकिन थेम्स में नहीं बहाए दिए

इस कार्यक्रम के लिए टिकट जारी किए गए थे।
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि आरती के दौरान थेम्स नदी में कोई दिए, फूल या दूसरी पूजा सामग्री नहीं डाली गई।
चिन्मय मिशन के प्रवक्ता ने बताया कि आरती में इस्तेमाल किए गए दीपक भी नदी में नहीं छोड़े गए, बल्कि किनारे पर ही रखे गए।
कार्यक्रम में कचरा कम करने और सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने पर भी ध्यान दिया गया। यानी आयोजन में धार्मिक परंपरा के साथ नदी और पर्यावरण की जिम्मेदारी को भी जोड़ा गया।
गंगा आरती का संदेश सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं
हिंदू परंपरा में गंगा आरती नदी और प्रकृति के लिए सम्मान जताने का एक तरीका है। उनके मुताबिक, आरती का संदेश सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है। यह लोगों को अपने आसपास के पर्यावरण की जिम्मेदारी निभाने की याद भी दिलाता है।
चिन्मय मिशन के 350 से ज्यादा केंद्र
चिन्मय मिशन की स्थापना 1951 में हुई थी। यह वेदांत पर आधारित वैश्विक संगठन है और दुनिया भर में इसके 350 से ज्यादा केंद्र हैं।
वहीं, टोटली थेम्स फेस्टिवल 1997 से आयोजित हो रहा है। इसमें थेम्स नदी से जुड़े कला, पर्यावरण, विरासत और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम होते हैं।
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