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श्रीनगर1 दिन पहलेलेखक: सुनील मौर्य और रउफ डार
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नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात एक व्यक्ति ने फायरिंग कर दी। हमलावर ने सिर पर कुछ इंच दूर से गोली चलाई थी। गनीमत रही कि सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर का हाथ ऊपर कर दिया और उन्हें गोली नहीं लगी।
अधिकारियों के मुताबिक फारूक जम्मू में एक शादी समारोह में पहुंचे थे। उनके साथ राज्य के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी भी थे। फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा-
मुझे ऊपर वाले ने बचाया है। शादी से निकलते समय मैंने कुछ आवाज सुनी, मुझे लगा कि यह पटाखा है। बाद में मुझे बताया गया कि एक आदमी ने पिस्तौल से दो गोलियां चलाईं। सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया, जिससे हथियार ऊपर की ओर हो गया और नुकसान होने से बच गया।

वहीं, हमलावर कमल ने पुलिस को बताया कि वह पिछले 20 सालों से फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था। हमलावर को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू में फायरिंग की घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात की और उनका हालचाल पूछा।

फारूक अब्दुल्ला ने ये भी बताया…
- मेरे पास मेरी सिक्योरिटी की तारीफ करने के लिए शब्द नहीं हैं। लोकल पुलिस वाले, मेरे साथ रहने वाले सिक्योरिटी वाले और NSG के सदस्य शामिल थे, जो मेरी सुरक्षा के लिए मेरे सामने खड़े थे।
- मैं उस आदमी को नहीं जानता, न ही किसी ने मुझे उसके बारे में कभी कुछ बताया। जहां तक उसके मकसद की बात है मुझे कैसे पता चलता कि वह क्या हो सकता था?
- सवाल यह है कि इस शादी में कई जाने-माने लोग मौजूद थे, इसलिए पुलिस को सही सावधानी बरतनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस का कोई इंतजाम नहीं था।
- सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उस शादी में कई जाने-माने लोग आए थे। ऐसे इवेंट में प्रोटेक्शन होना जरूरी था, खासकर आज जिस तरह के माहौल में हम रह रहे हैं।
- इस मामले की सही जांच होनी चाहिए। अब यह गृहमंत्री पर है कि वे जांच करें और पता लगाएं कि ऐसा क्यों हुआ और इसका क्या कारण था। आजकल इस तरह की चीजें होती रहती हैं।
- हमलावर को हमेशा फायदा होता है। उसे पता होता है कि वह आपको कहां टारगेट करना चाहता है। लेकिन मैं यह नहीं कहूंगा कि सिक्योरिटी और बढ़ानी चाहिए। यह मुख्य मुद्दा नहीं है।

हमलावर कमल सिंह जमवाल को गुरुवार को मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया।
हमलावर ने पहले कहा यही मकसद था, फिर बोला- गलती हो गई
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला पर हमला करने का आरोपी कमल सिंह जामवाल पर पूछताछ में कई बार बयान बदल चुका है। घटना के बाद रात में उसने दावा किया था कि पिछले 20 साल से वो फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था।
आरोपी ने कहा था कि यही मेरी जिंदगी का मकसद था। लेकिन घटना के बाद अगली सुबह उसने कहा कि हमसे गलती हो गई। अब पछतावा हो रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये घटना के समय थोड़ा नशे में भी था। गुरुवार को मेडिकल जांच के लिए ले जाते वक्त जामवाल ने कहा- मैंने किसी के कहने पर गोली नहीं चलाई। मैंने अपनी मर्जी से गोली चलाई है।
जांचकर्ताओं ने शुरुआती तौर पर ये माना है कि आरोपी फायरिंग करते समय कथित तौर पर शराब पी हुई थी। पुलिस सूत्रों ने कहा कि आरोपी अगले दिन पछतावे की हालत में लग रहा था और उसने ऐसे बयान दिए जो उसके पहले के दावों से उलट थे।
आरोपी ने पूछताछ के दौरान कई अलग-अलग बातें बताई हैं। इसलिए उससे अलग-अलग कई अधिकारियों ने बारी-बारी से पूछताछ की है। जिससे उसके असली वजह का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही पुलिस उसके 20 साल पुराने बैकग्राउंड की भी जांच कर रही है। आरोपी के पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई है।
सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई घटना…
घटना का सीसीटीवी भी सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि 70 साल के हमलावर कमल सिंह जामवाल ने पीछे से आकर फारूक के सिर पर रिवॉल्वर तान दी। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हमलावर का हाथ हटाया जिससे फायर हवा में हो गया।
6 तस्वीरों में देखें पूरी वारदात…
हमलावर ने फारूक का पीछा किया

हमलावर कमल पीछे चलते हुए फारूक अब्दुल्ला के करीब आता है।
सिर पर रिवॉल्वर तानी

इसके बाद वह फारूक अब्दुल्ला के सिर के पास रिवॉल्वर लेकर जाता है और फायर करता है।
सिक्योरिटी गार्ड ने हमलावर की कोहनी पकड़कर हाथ उठाया

फायर करते ही सुरक्षाकर्मी कमल को पकड़कर जमीन पर गिरा देते हैं।
हमलावर को भीड़ ने पकड़ लिया

घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मी और वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया।
हमलावर के साथ मारपीट

कुछ लोगों ने आरोपी कमल सिंह को पकड़ने के बाद उसके साथ मारपीट भी की।
थाने में हमला करना कबूल किया

ये हमलावर कमल सिंह है। सुरक्षाकर्मी उससे पूछताछ कर हमले के कारणों का पता लगा रहे हैं।
जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
नेशनल कॉन्फ्रेंस के हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बुधवार को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर हाल ही में हुए हमले की निंदा करते हुए जम्मू में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पार्टी के झंडे, प्लेकार्ड और बैनर लिए हुए थे और केंद्र और लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
पार्टी नेताओं ने इस घटना को केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती बताया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक सीनियर नेता ने रैली को संबोधित करते हुए प्रदर्शनकारियों से कहा, हमारे नेता पर हमला मंजूर नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।

जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने प्रदर्शन किया।
पुलिस बोली- हमलावर के पास कई साल से लाइसेंसी हथियार
पुलिस के मुताबिक, हमलावर पिछले कई सालों से लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल कर रहा है। फारूक अब्दुल्ला, सुरिंदर चौधरी और दूसरे बड़े नेता नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता सुरजीत सिंह के बेटे की शादी में शामिल हुए थे। हमलावर सुरजीत सिंह का कजिन है। वह बिजनेसमैन है और उसकी पुराने शहर में कुछ दुकानें हैं।
CM उमर बोले- Z+ सिक्योरिटी में कोई करीब कैसे आया
फारूक के बेटे और जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने X पर लिखा कि एक आदमी लोडेड पिस्टल लेकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज में आ गया और गोली चला दी। अल्लाह का शुक्र है कि मेरे पिता बाल-बाल बचे। सवाल उठता है कि कोई Z+ NSG प्रोटेक्टेड पूर्व CM के इतने करीब कैसे पहुंच गया।
घटना के बाद डिप्टी CM सुरिंदर चौधरी ने कहा- पुलिस से पूछना चाहिए कि रॉयल पार्क में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। वहां लोकल पुलिस से कोई नहीं था। यह बहुत बड़ी सिक्योरिटी चूक है।

घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला के घर के बाहर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।
फारूक अब्दुल्ला 3 बार CM रह चुके हैं
डॉं फारूक जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके पिता शेख अब्दुल्ला भी मुख्यमंत्री थे। फारूक के बेटे उमर अब्दुल्ला अभी राज्य के मुख्यमंत्री हैं।
फारूक ने मेडिकल की पढ़ाई की और कुछ समय तक डॉक्टर के रूप में काम किया, लेकिन बाद में वे राजनीति में आ गए और अपने पिता की पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति करने लगे।
सीएम के रूप में फारूक का पहला कार्यकाल 1982 से 1984 तक रहा। 1986 से 1990 तक वे दूसरी बार और 1996 से 2002 तक तीसरी बार मुख्यमंत्री रहे। वे लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं। अब्दुल्ला 2009 से 2014 तक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री भी रह चुके हैं।

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