नई दिल्ली6 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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तस्वीर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 2024 में रूस के कजान में हुई मुलाकात की है। दोनों नेता BRICS समिट में शामिल होने पहुंचे थे।
भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं।
अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है।
जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है।
जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा
जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े।
जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा।
भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव
पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं।
- अक्टूबर 2024: कजान में मोदी-शी की मुलाकात से पहले पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने पर सहमति बनी।
- 2025: कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात की।
- मार्च 2026: भारत ने चीनी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में ढील दी।
- जून 2026: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली में अजीत डोभाल से मुलाकात की।
- जुलाई 2026: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग का दौरा किया। इसके बाद सीमा वार्ता और जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा की तैयारियां आगे बढ़ीं।
व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में
भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है।
पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात
BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है।
सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
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