DDU में स्टूडेंट्स ने सीखी जान बचाने की तकनीक:CPR पर प्रैक्टिकल वर्कशॉप में एक्सपर्ट्स बोले- 'गोल्डन मिनट्स' बेहद कीमती


दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी के गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में बुधवार को CPR पर एक साइंटिफिक और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम हुआ। सुबह 11 बजे शुरू इस प्रोग्राम में यूनिवर्सिटी के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्टूडेंट्स ने डमी (मैनिकिन) पर खुद प्रैक्टिस करके इमरजेंसी में जान बचाने की तकनीक सीखी। ट्रेनिंग में मुख्य अतिथि और वाराणसी के इमरजेंसी मेडिकल एक्सपर्ट डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि आजकल युवाओं में भी सडन कार्डियक अरेस्ट के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में शुरुआती कुछ मिनट यानी ‘गोल्डन मिनट्स’ बेहद कीमती होते हैं। अगर उस वक्त सही तकनीक से चेस्ट कम्प्रेशन (सीना दबाकर) सीपीआर दिया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। हर नागरिक को CPR देने आना चाहिए
उन्होंने कहा कि सीपीआर केवल डॉक्टर्स की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर जागरूक नागरिक को यह हुनर आना चाहिए। उन्होंने हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच अंतर, मरीज की पहचान करने, इमरजेंसी हेल्पलाइन को कॉल करने और कृत्रिम सांस देने के नियम भी समझाए। लाइफ-सेविंग स्किल्स सिखाना यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी- VC
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के काम आने वाले लाइफ-सेविंग स्किल्स सिखाना भी है। आज के दौर में सीपीआर की जानकारी हर पढ़े-लिखे इंसान के लिए बहुत जरूरी है। हेल्थ व सेफ्टी को सबसे ऊपर रखती यूनिवर्सिटी- प्रो. दिव्या रानी वहीं कार्यक्रम की संयोजक प्रो. दिव्या रानी सिंह (हेड, गृह विज्ञान) ने कहा कि यूनिवर्सिटी अपने स्टाफ और स्टूडेंट्स की हेल्थ व सेफ्टी को सबसे ऊपर रखती है और यहाँ सीखी गई तकनीक किसी भी अनजान व्यक्ति के लिए जीवनदान बन सकती है। इस दौरान प्रतिभागियों ने डमी पर सीपीआर देने का अभ्यास किया और इसे बेहद उपयोगी बताया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आगे भी ऐसे अवेयरनेस कैंप आयोजित करने का संकल्प लिया। इस वर्कशॉप का उद्देश्य कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थिति में लोगों को तुरंत और सही मेडिकल मदद देने के काबिल बनाना था। कार्यक्रम में डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. अनुभूति दुबे, डीन कॉमर्स प्रो. आर. पी. सिंह, शोधपीठ के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कुशल नाथ मिश्र, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. सोनल सिंह, डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार और डॉ. सुनीता समेत कई विभागाध्यक्ष, टीचर्स व स्टूडेंट्स मौजूद रहे।

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