सुजीत कुमार | बलरामपुर4 मिनट पहले
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बलरामपुर जिला प्रशासन ने खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनावश्यक टैगिंग रोकने के लिए अभियान तेज कर दिया है। इसका उद्देश्य किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना है। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन के निर्देश पर सहकारिता, कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें लगातार उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर औचक छापेमारी और जांच कर रही हैं।
इस अभियान के तहत अब तक 25 थोक, फुटकर, सहकारी और निजी उर्वरक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान सात उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए एकत्र किए गए हैं।
टीमों ने पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक का मौके पर भौतिक सत्यापन किया। इसके साथ ही स्टॉक रजिस्टर, बिक्री पंजिका, लाइसेंस, रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड सहित अन्य अभिलेखों की भी बारीकी से पड़ताल की गई। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए मेसर्स चौधरी बीज दवा व खाद भंडार, हरनहवा परसिया, पचपेड़वा; मेसर्स चौधरी ट्रेडर्स, हरनहवा परासिया, पचपेड़वा (तुलसीपुर); और मेसर्स नफीस खाद एवं बीज भंडार, रजडेरवा चौराहा, पचपेड़वा के उर्वरक विक्रय प्राधिकरण-पत्र निलंबित कर दिए हैं। इसके अतिरिक्त, छह विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि दो अन्य विक्रेताओं को चेतावनी देकर भविष्य में अनियमितता न करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी बोई गई फसल की आवश्यकता के अनुसार, पीओएस मशीन और आधार आधारित सत्यापन के बाद ही निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराई जाए। खाद के साथ किसी अन्य उत्पाद की खरीद के लिए किसान को बाध्य करना या किसी भी प्रकार की टैगिंग करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
दुकानों पर रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड और प्रतिष्ठान का साइन बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने तथा सभी अभिलेख अद्यतन रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि ओवररेटिंग, टैगिंग, कृत्रिम अभाव पैदा करने या जमाखोरी जैसी अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश-1985 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसानों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लगातार चलने वाला अभियान है। आने वाले दिनों में भी उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच और छापेमारी जारी रहेगी। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और निर्धारित मूल्य पर उर्वरक लेने के बाद उसकी रसीद अवश्य प्राप्त करें। अधिक कीमत वसूले जाने, टैगिंग, खाद की कृत्रिम कमी या किसी अन्य अनियमितता की जानकारी मिलने पर तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचना दें, ताकि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सके। प्रशासन की सख्ती का संदेश साफ है—किसान को खाद के लिए परेशान किया या निर्धारित कीमत से एक रुपया भी अधिक वसूला तो कार्रवाई तय है।
