विजय पाठक | अयोध्या2 मिनट पहले
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अयोध्या में शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को अयोध्या जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित देवी मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्त मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा के दर्शन-पूजन के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे।
दिन चढ़ने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। मंदिरों में घंटा-घड़ियाल की गूंज और ‘जय माता दी’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में मत्था टेककर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
नवरात्र को लेकर देवी मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक सजावट से सजाया गया है। जिले के प्रमुख देवकली मंदिर, कामाख्या धाम, आदि मां दुर्गा मंदिर और जालपा देवी चतुर्भुजी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों में भक्तों की आवाजाही बनी रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में भी सुबह से ही पूजा-अर्चना और आरती का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिरों के आसपास चुनरी, प्रसाद, नारियल और फूलों की दुकानें भी सजी रहीं।

पंडित जमुना प्रसाद ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा की चौथी शक्ति मां कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में भी जाना जाता है। मां कुष्मांडा का स्वरूप शांत, सौम्य और मनोहारी माना गया है।
उनकी आठ भुजाएं हैं और उनका वाहन सिंह है। उनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं, जबकि आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को प्रदान करने वाली जपमाला रहती है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि मां कुष्मांडा सूर्यमंडल के मध्य में निवास करती हैं और अपनी दिव्य शक्ति से सूर्य मंडल को नियंत्रित करती हैं। मां की आराधना से साधक के जीवन में सकारात्मकता आती है तथा रोग, शोक और कष्टों से मुक्ति मिलने की कामना की जाती है।
मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु सुख, शांति, दीर्घायु और यश की प्रार्थना करते हैं। नवरात्र के चौथे दिन मंदिरों में उमड़ी भीड़ से पूरे जिले में भक्तिमय माहौल बना रहा।
