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लखनऊ में साइबर ठगों ने जांच एजेंसियों के नाम पर दो लोगों को अपना शिकार बनाया। जालसाजों ने खुद को NIA, ATS और CBI का अधिकारी बताकर पीड़ितों को वीडियो कॉल पर बंधक जैसा रखा और डर का माहौल बनाकर उनसे कुल 1 करोड़ 41 लाख 50 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए।
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केस-1: NIA अधिकारी बन 9.5 लाख की ठगी
इंदिरानगर सेक्टर-14 निवासी बद्री प्रसाद को 6 अप्रैल को व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को NIA का अधिकारी बताते हुए कहा कि वे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं और उनके खिलाफ वारंट जारी हो चुका है।
ठगों ने उन्हें लगातार 3 दिन तक वीडियो कॉल पर रखा। इस दौरान परिवार या किसी अन्य से बात करने से मना किया गया। फर्जी दस्तावेज दिखाकर कार्रवाई से बचाने का झांसा दिया गया।
डर के चलते पीड़ित ने 7 अप्रैल को 7.50 लाख और 9 अप्रैल को 2 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का एहसास होने पर 1930 हेल्पलाइन और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई।
केस-2: ATS-CBI बनकर बुजुर्ग दंपती से 1.32 करोड़ ठगे
गोमतीनगर निवासी 75 वर्षीय दिलीप नारायण पाण्डेय और उनकी पत्नी को 27 मार्च की रात साइबर अपराधियों ने कॉल किया। आरोपियों ने खुद को ATS और CBI अधिकारी बताते हुए चार कथित आतंकियों की फोटो भेजी और कहा कि पूछताछ में उनका नाम सामने आया है।
इसके बाद दंपती को डिजिटल अरेस्ट में लेकर लगातार वीडियो कॉल पर रखा गया। उन्हें हर घंटे “I am safe” मैसेज भेजने और किसी से बात न करने की हिदायत दी गई।
आरोपियों ने आधार के दुरुपयोग, मुंबई में फर्जी सिम और बैंक खाता खोलकर हवाला लेनदेन जैसे गंभीर आरोप लगाकर डराया। फिर रिजर्व बैंक के नाम पर फर्जी खाते में पैसे जमा कराने को कहा।
4 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच चार किस्तों में 1 करोड़ 32 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। यह रकम उन्होंने हरदोई में मकान बेचकर जुटाई थी।
फर्जी वर्दी, सुप्रीम कोर्ट का लोगो और बदलते नंबर
ठगों ने ATS की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की, सुप्रीम कोर्ट का फर्जी लोगो लगाकर आरोप पत्र भेजा और बार-बार मोबाइल नंबर बदलते रहे, ताकि शक न हो।