श्रीकृष्ण जन्मभूमि से हटे अवैध कब्जा:मथुरा पहुंचे संत विश्व प्रसन्न तीर्थ महाराज ने कहा,अपने मूल गर्भ गृह में विराजेंगे कन्हैया'


जगद्‌गुरु मध्वाचार्य मूल महासंस्थान के प्रतिष्ठित पीठाधीश श्री पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी के पीठाधीश्वर एवं श्रीराम जन्मभूमिये तीर्थ क्षेत्र न्यास के ट्रस्टी श्री श्री 1008 विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण की विशिष्ट पूजा अर्चना की। द्वैत वेदांत परंपरा के अनुरूप वैदिक मंत्रों के सस्वर पाठ के साथ संपन्न इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में ब्रज की सहज भक्ति एवं उडुपी की उपासना परंपरा दोनों के ही दर्शन हुऐ। भगवान का किया पूजन इस संबंध में जानकारी देते हुऐ श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि श्रीभागवत भवन में जगद्‌गुरु मध्याचार्य मूल महासंस्थान के प्रतिष्ठित पीठाधीश श्री पेजावर अधोक्षज मठ के पीठाधीश्वर विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम एवं भगवान हयग्रीव के श्रीविग्रह की स्थापना के उपरान्त तुलसी दल, कमल पुष्प आदि पूजन-भोग सामग्री से ठाकुरजी का पूजन किया। स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज श्रीठाकुरजी के 800 वर्ष से पूजित चल-विग्रह के साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर पधारे और श्री ठाकुरजी के समक्ष समस्थान पूजन किया। ब्रजवासियों एवं श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर द्वैत दर्शन परंपरा से संपन्न हुए समस्थान पूजन और ब्रज की भावमय भक्ति दोनों के ही एक साथ दर्शन किये। कपिल शर्मा ने बताया जगद्‌गुरु माध्वाचार्य के द्वारा पूजित लगभग 800 वर्ष पुराने भगवान के यह चल विग्रह अत्यन्त सजीय एवं दिव्य है। स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीगर्भ गृह में तुलसी एवं पुष्यों के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ एवं पुष्पार्चन किया। आध्यात्मिक रूप से भाव विभोर हुए स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज पूजन के उपरान्त आध्यात्मिक रूप से भाव-विभोर स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने कहा कि सनातन के पवित्र स्थलों को तोड़कर आताताइयों के द्वारा बनाये गये ढाँचे करोड़ों-करोड़ सनातनी धर्मावलम्बियों को आहत करते है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बने अत्यन्त भव्य एवं कलात्मक मंदिर को तोड़कर न सिर्फ मंदिरों की संपत्तियों को लूटा अपितु सनातन के इस अति पवित्र स्थान पर विधर्मी आताताइयों द्वारा मस्जिद का निर्माण कर सनातनियों को अपमानित करने का कार्य किया है। इतिहास साक्षी है कि सनातन पर निरन्तर आघात हुए है, किन्तु सनातनियो के धैर्य एवं पराक्रम से आतातायी अन्तोगत्या पराजित ही हुये हैं। उन्होंने कहा भारतवर्ष में यह काल सनातन के गौरवमय स्वरूप एवं सांस्कृतिक पुनरोत्थान का विशिष्ट काल है। अयोध्या में रामलला दिव्य एवं अलौकिक मंदिर में विराजमान हो गये हैं, काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर अपने अलौकिक एवं आध्यात्मिक स्वरूप को प्राप्त कर रहा है। अब नथुरा में भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला निश्चित करेंगे। सांस्कृतिक आध्यात्मिक संस्कृति के पुनरोद्धार का शंखनाद हो चुका है, अन्याय एवं अत्याचार के प्रतीक हटेंगे, न्याय की बांसुरी बजेगी। कपट का अंत और सत्य की विजय दोनों ही शास्वत है और कृष्ण के संदेश भी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने स्वामी 1008 विश्वप्रसन्न तीर्थ महारा का स्वागत तुलसी-माला, पुष्पमाला एवं अंगवस्त्र के साथ किया। महाराजश्री ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का भ्रमण मृदंग, झांझ एवं मजीरों की मंगल ध्वनि एवं हरिनाम संकीर्तन के मध्य किया।

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