यूपी में भाजपा के 8 राज्यसभा प्रत्याशियों का ऐलान:इनमें 2 महिलाएं; बीएल वर्मा और हरदीप पुरी की मोदी मंत्रिमंडल से छुट्‌टी संभव


यूपी में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 8 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इनमें 2 महिलाएं हैं। बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और बरेली की श्रुति गंगवार को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। श्रुति झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की बेटी हैं। वह वर्तमान में बरेली अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की अध्यक्ष हैं। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, रविकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्णा पांडेय, राम प्रताप सिंह चौहान को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा प्रत्याशियों में दो ब्राह्मण, एक ठाकुर, तीन पिछड़े और दो दलित हैं। पिछड़े वर्ग में एक लोधी, एक कुर्मी और एक पाल समाज से हैं। वहीं दलित वर्ग में एक खटीक और एक पासी समाज से हैं। भाजपा ने इन सीटों पर मौजूदा सात सदस्यों में से किसी को भी दोबारा मौका नहीं दिया है, बल्कि सभी आठ सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं। केंद्र में मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा की मोदी मंत्रिमंडल से छुट्‌टी लगभग तय मानी जा रही है। बीएल वर्मा की जगह धर्मपाल सिंह भाजपा ने केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा को राज्यसभा का टिकट नहीं दिया है। लिहाजा उनकी भी मोदी मंत्रिमंडल से छुट्‌टी तय हो गई है। उनकी जगह योगी सरकार के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है। बीएल वर्मा को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। पूर्व सीएम कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह और बीएल वर्मा में लोध समाज के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक प्रतिद्वंदिता है। बीएल वर्मा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद के भी प्रबल दावेदार थे। लेकिन लोध समाज ने राजू भैया के नेतृत्व ने उनका पुरजोर विरोध किया। बीएल वर्मा और राजबीर सिंह के बीच टकराव में भाजपा ने मध्यम मार्ग चुनते हुए लोध समाज से धर्मपाल सिंह को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया है। बीएल वर्मा को राज्यसभा सदस्य नहीं बनाए जाने से साफ है कि उन्हें मोदी मंत्रिमंडल से भी हटाया जाएगा। लिस्ट देखिए… 8 प्रत्याशियों को जानिए… 1. धर्मपाल सिंह: आंवला से विधायक, लोधी समाज का प्रमुख चेहरा
धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। उनका जन्म 15 जनवरी 1953 को हुआ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड के मुताबिक वे लोधी-राजपूत समुदाय से आते हैं। वे आंवला सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं और 2022 में भी चुनाव जीता था। 2. राधाकांत ओझा: इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता
राधाकांत ओझा प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। भाजपा में उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। 2024 में फूलपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी उनका नाम भाजपा के संभावित दावेदारों में प्रमुखता से सामने आया था। 3. प्रकाश पाल: भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष
प्रकाश पाल फिलहाल भाजपा उत्तर प्रदेश के पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। जून 2026 में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी संगठन में उनकी भूमिका पिछड़े वर्ग के बीच भाजपा की राजनीतिक पहुंच से जुड़ी हुई है। 4. विद्यासागर सोनकर: पूर्व सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता
विद्यासागर सोनकर जौनपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। वे पहले लोकसभा सांसद रह चुके हैं और भाजपा संगठन में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के रिकॉर्ड में उनकी शैक्षिक योग्यता एमए, बीएड और एलएलबी दर्ज है। पेशे से वे अधिवक्ता और कृषक रहे हैं। 5. गोपी कृष्ण पांडेय: संगठन से जुड़े भाजपा नेता
गोपी कृष्ण पांडेय का नाम भाजपा ने पहली बार इस स्तर पर राज्यसभा प्रत्याशी के तौर पर सामने रखा है। 6. प्रियंका सिंह रावत: बाराबंकी की पूर्व सांसद
प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी लोकसभा सीट से 2014 में भाजपा के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं। वह बाराबंकी की पहली महिला सांसद बनी थीं। 2019 में भाजपा ने उनकी जगह उपेंद्र सिंह रावत को टिकट दिया। वर्तमान में वह भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। 7. राम प्रताप सिंह चौहान: भाजपा प्रदेश महामंत्री
राम प्रताप सिंह चौहान आगरा से आने वाले भाजपा के वरिष्ठ संगठनकर्ता हैं। जून 2026 में उन्हें फिर से उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया। वे 1991-94 के दौरान भाजपा युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। 8. श्रुति गंगवार: बरेली की भाजपा नेत्री
श्रुति गंगवार बरेली के बहेड़ी क्षेत्र में सक्रिय भाजपा नेता हैं और अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन भी हैं। वह संगठन और स्थानीय राजनीति में सक्रिय रही हैं। सितंबर-अक्टूबर 2026 में वह बहेड़ी क्षेत्र में भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आई हैं। जातीय-सामाजिक समीकरण भी खास इन 8 नामों में भाजपा ने अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को जगह दी है। धर्मपाल सिंह लोधी समाज से आते हैं, विद्यासागर सोनकर दलित समाज के प्रमुख भाजपा नेताओं में हैं, जबकि प्रकाश पाल पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार महिला चेहरों के तौर पर शामिल हैं। राधाकांत ओझा के जरिए पार्टी ने कानूनी पेशे से जुड़े वरिष्ठ चेहरे को जगह दी है। जानिए वोटिंग होने पर कैंडिडेट जिताने का अंकगणित क्या है? यूपी विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 403 है। मौजूदा समय में 7 सीटें खाली हैं। यानी, मौजूदा समय में 396 विधायक हैं। राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव के लिए जो फॉर्मूला अपनाया जाएगा, वह 396/11+1 होगा। यानी 396 को 11 से भाग देने पर जो संख्या आएगी, उसमें एक जोड़ा जाएगा। यानी एक सदस्य को चुनने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ेगी। अगर किसी ने एक्स्ट्रा कैंडिडेट नहीं उतारे तो बीजेपी 8 और सपा 2 प्रत्याशी निर्विरोध जिताने में सफल होगी। लेकिन अगर चुनाव हुए तो दोनों खेमों में किसी एक का गणित बिगड़ सकता। दरअसल, सपा के पास मौजूदा समय में 100 विधायक ही हैं। इसमें से भी रमाकांत यादव जेल में बंद हैं। यानी संख्या घटकर 99 रह जाती है। वह दो प्रत्याशी तो आराम से जिता सकती लेकिन तीसरे प्रत्याशी को उतारती है तो वोटिंग होना तय है। ऐसे में सपा को तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए कम से कम 12 और एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत पड़ेगी। इस स्थिति में भाजपा को 8वां कैंडिडेट जिताने के लिए कम से कम 6 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत पड़ेगी। अगर वोटिंग होती है तो क्रास वोटिंग का भी खतरा मंडराने लगेगा। ऐसे में दूसरी और तीसरी वरीयता के वोटों की गिनती अहम हो जाती है। इसके लिए विधायकों को बकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि किस विधायक को किस कैंडिडेट के लिए प्रथम वरीयता पर रखना है और किसे दूसरी व तीसरी वरीयता पर। इसी तरह गिनती में निर्धारित कोटे तक पहुंचने पर संबंधित प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जाता है। अब जानिए सपा प्रत्याशियों के बारे में… सपा प्रत्याशी धनराज परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। उन्हें जाने-माने बिजनेसमैन मुकेश अंबानी का करीबी माना जाता है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी हैं। पिता परिमल नथवानी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं। 3 महीने पहले NDA के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। जबकि सपा के दूसरे प्रत्याशी प्रो.रामगोपाल यादव, अखिलेश यादव के चाचा हैं। वह 90 के दशक से लगातार राज्यसभा में सपा की ओर से जा रहे हैं। एक बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। वर्तमान में राम गोपाल यादव पार्टी के प्रमुख महासचिव भी हैं।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *