संजयन बोले: टिकट कटने के बाद BJP ने नहीं मनाया:कहा- सपा आते ही पुरानी पेंशन और वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय बढ़ेगा


उत्तर प्रदेश विधान परिषद की गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चुनावी जंग अब और दिलचस्प हो गई है। बीजेपी से लगातार दूसरी बार टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दल प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने वाले डॉ. संजयन त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय में उन्हें सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही डॉ. संजयन को इस सीट से सपा का अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। डॉ. संजयन ने बातचीत में कहा कि वे लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे हैं और 2010 तथा 2017 में गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर रहे थे। 2023 में उन्होंने बीजेपी से टिकट के लिए आवेदन किया, लेकिन टिकट नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि 2026 के शिक्षक एमएलसी चुनाव की तैयारी भी उन्होंने पार्टी के कहने पर शुरू की थी। इस बार भी टिकट कटने के बाद उन्हें निराशा हुई। उनके मुताबिक, पार्टी हाईकमान की ओर से उन्हें कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 1 तारीख को निर्दल प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया। अब दैनिक भास्कर से बातचीत को पढिए डॉ संजयन्द्र त्रिपाठी ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए पिछले दिनों के राजनीति उठापठक को बताया और उन्होंने भाजपा से सपा में जाने की पूरी वजह भी खुलकर बताई। सपा ने संपर्क किया, प्रस्ताव स्वीकार किया डॉ. संजयन ने बताया कि निर्दल नामांकन के बीच समाजवादी पार्टी की ओर से उनसे संपर्क किया गया। उन्हें पार्टी की ओर से प्रस्ताव मिला, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने सपा की सदस्यता ग्रहण की और अखिलेश यादव ने उन्हें गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि बार-बार टिकट कटना निराशा का कारण बनता है। बीजेपी की ओर से किसी ने भी उन्हें यह भरोसा नहीं दिया कि उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई समाधान निकलेगा। जब तक बातचीत की संभावना सामने आई, तब तक काफी देर हो चुकी थी। कमलेश यादव के टिकट कटने पर बोले- उनका त्याग सराहनीय सपा ने पहले इस सीट से कमलेश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था। बाद में उनका टिकट काटकर डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया गया। इस पर संजयन ने कहा कि कमलेश यादव से उनके बहुत अच्छे रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के हित में कमलेश यादव ने जिस तरह त्याग किया है, वह एक कार्यकर्ता के नैतिक कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन है। अब दोनों मिलकर चुनाव में सपा के पक्ष में सीट लाने का प्रयास करेंगे। बोले- सब विधि का विधान, हम सिर्फ माध्यम बीजेपी छोड़कर सपा में जाने के फैसले पर डॉ. संजयन ने कहा कि यह सब पहले से निर्धारित था। उन्होंने कहा कि व्यक्ति केवल माध्यम होता है और जो होना होता है, वह होकर रहता है। उन्होंने कहा, “मेरा बीजेपी छोड़ना और सपा में जाना… ये सब पहले से ही लिखा गया होगा। हम नियति के अधीन हैं। जो जैसे होना होगा, होकर रहेगा।” अखिलेश से दो मांगें रखीं, दोनों पर मिला आश्वासन सपा में शामिल होने के दौरान डॉ. संजयन ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने शिक्षकों से जुड़ी दो प्रमुख मांगें रखीं। इनमें पुरानी पेंशन बहाली और वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय देने की मांग शामिल है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अखिलेश यादव से कहा था कि यदि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन मांगों को स्वीकार कर सार्वजनिक घोषणा करते हैं तो शिक्षक समाज सीधे तौर पर पार्टी से जुड़ सकता है। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव ने दोनों मांगों को स्वीकार किया और घोषणा की कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इन फैसलों को लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री से बोले- बीजेपी प्रत्याशी के नामांकन से पहले पुरानी पेंशन बहाली का ऐलान करें डॉ. संजयन ने मुख्यमंत्री से भी अपील की है कि बीजेपी प्रत्याशी के नामांकन के दिन पुरानी पेंशन बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मानदेय की घोषणा की जाए। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ऐसा करते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी और शिक्षक मतदाताओं से वे बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन देने की अपील तक कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे खुद भी मुख्यमंत्री के साथ खड़े होने को तैयार हैं। शिक्षक चुनाव में राजनीतिक रंग, बीजेपी पर साधा निशाना डॉ. संजयन ने कहा कि इस बार शिक्षक एमएलसी चुनाव पहले की तुलना में ज्यादा राजनीतिक हो गया है। सभी प्रमुख दल इसमें मजबूती से भाग ले रहे हैं। हालांकि उन्होंने इसे सीधे तौर पर बीजेपी बनाम सपा की लड़ाई मानने से इनकार किया। उन्होंने बीजेपी पर शिक्षकों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में पुरानी पेंशन समाप्त कर दी गई और सदन में मौजूद सत्ता पक्ष के कई विधायक इस मुद्दे पर मौन रहे। उन्होंने ग्रुप इंश्योरेंस का लाभ और परिवार नियोजन भत्ते जैसी सुविधाएं समाप्त किए जाने का भी जिक्र किया। संजयन ने दावा किया कि प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने का भी शिक्षकों पर असर पड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि शिक्षकों की इतनी अनदेखी के बाद अब दोबारा उन्हीं शिक्षकों से वोट कैसे मांगा जा सकता है। अब फिर दाखिल करेंगे नामांकन सपा का अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने के बाद डॉ. संजयन त्रिपाठी अब दोबारा नामांकन दाखिल करेंगे। शनिवार को सपा मुख्यालय में उनके पार्टी में शामिल होने के दौरान पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी भी मौजूद रहे। डॉ. संजयन के सपा में आने और कमलेश यादव का टिकट कटने के बाद गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनावी मुकाबला नए समीकरणों के साथ सामने आया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि शिक्षक मतदाता नए राजनीतिक समीकरणों पर कितना भरोसा जताते हैं। तीन तस्वीरें से सियासी समीकरण समझिए भाजपा से टिकट नहीं मिला तो कार से हटाया झंडा डॉ. संजयन त्रिपाठी पिछले कुछ वर्षों से भाजपा में सक्रिय थे। वह पूरी तरह आश्वस्त थे कि उन्हें भी भाजपा अपना टिकट देगी। लेकिन टिकट वर्तमान एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी को मिला। जिसके बाद निराशन संजयन ने निर्दल चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने गुरुवार को ही पर्चा भी दाखिल कर दिया। पर्चा दाखिल कर बाहर आने के बाद उन्होंने अपनी गाड़ी से भाजपा का झंडॉ उतार दिया। इसी के बाद से वह सपा के संपर्क में आए और शुक्रवार की सुबह तक उनके सपा ज्वाइन करने की बात पक्की हो गई। पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी उन्हें साथ लेकर लखनऊ पहुंचे। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात भी हुई। सपा प्रमुख ने पूर्व में घोषित प्रत्याशी कमलेश यादव को भी लखनऊ बुला लिया। उन्हें पहुंचने में देर हुई इसलिए शुक्रवार को पार्टी ज्वाइन करने की घोषणा नहीं हो सकी। शनिवार को औपचारिक ऐलान हो गया।

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