357 साल बाद एक हुए बिछड़े खानदान के लोग:मुस्लिम परिवार ने ब्राह्मण रिश्तेदारों को दिया भोज, काशी-जौनपुर से पहुंचे परिजन


जौनपुर के डेहरी गांव में शनिवार को 357 साल बाद एक खानदान के बिछड़े हुए लोग एक साथ आए। परिवार के इतिहास के मुताबिक 1669 में मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में परिस्थितियों के चलते पूर्वजों के रास्ते अलग हो गए थे। शनिवार को काशी और जौनपुर से पहुंचे ब्राह्मण रिश्तेदारों का नौशाद अहमद दूबे के घर पर भावुक स्वागत किया गया। इसके बाद नौशाद अहमद दूबे ने भोजभात का आयोजन किया, जिसमें परिवार के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया और फिर कभी न बिछड़ने का संकल्प लिया। बेटी की शादी के कार्ड से शुरू हुई रिश्तों की तलाश परिवार के अनुसार, नौशाद अहमद दूबे के आठ पीढ़ी पहले के पूर्वज लाल बहादुर दूबे आजमगढ़ के रानी की सराय में रहते थे। 1669 में उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया और बाद में जौनपुर के डेहरी गांव में आकर बस गए। परिवार के बाकी भाई और रिश्तेदार रानी की सराय छोड़कर जौनपुर और पूर्वांचल के दूसरे जिलों में फैल गए। 357 साल बाद नौशाद अहमद दूबे ने अपनी बेटी की शादी के कार्ड पर ‘दूबे’ उपनाम लिखा। इसके बाद बिखरे परिवार के लोगों ने अपने पूर्वजों की तलाश शुरू की। लाल बहादुर दूबे का नाम सामने आने पर कई हिंदू ब्राह्मण परिवारों का नौशाद अहमद दूबे से रिश्ता जुड़ गया चार साल की खोज के बाद मिले रिश्तेदार विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इतिहासकार डॉ. राजीव श्रीगुरुजी तथा उनकी रिसर्च टीम ने परिवार के इतिहास और रिश्तेदारों की तलाश में अहम भूमिका निभाई। चार साल की मेहनत के बाद पूर्वांचल के कई परिवारों से रिश्तों की कड़ियां जुड़ीं। जौनपुर के शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि नौशाद अहमद दूबे उनकी बुआ की तरफ से रिश्तेदार हैं। वहीं, वाराणसी के विवेक मिश्रा ने कहा कि नौशाद अहमद दूबे उनके ननिहाल पक्ष से हैं और उनके मामा लगेंगे। एक पंक्ति में बैठे रिश्तेदार, मुस्लिम परिवार ने परोसा भोजन पूर्वांचल में बिछड़े रिश्तों को जोड़ने के लिए भोजभात की परंपरा है। इसी परंपरा के तहत नौशाद अहमद दूबे ने अपने बिछड़े रिश्तेदारों को भोज पर आमंत्रित किया। कार्यक्रम में ब्राह्मण समुदाय के लोग एक पंक्ति में बैठे और मुस्लिम परिवार के सदस्यों ने उन्हें भोजन परोसा। भोजन के बाद परिवार के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और भविष्य में संपर्क बनाए रखने तथा फिर न बिछड़ने का संकल्प लिया। बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत प्रभु रामदास ने कहा कि परिवार के सभी लोग खून, खानदान और रिश्ते से एक हैं। कोई भी पूजा पद्धति खून के रिश्ते को अलग नहीं कर सकती। उन्होंने नौशाद अहमद दूबे को परिवार का बड़ा बताते हुए उनके प्रति आदर-सम्मान बनाए रखने की बात कही। विजय शर्मा ने गौशाला का उद्घाटन किया इस पारिवारिक मिलन के साक्षी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक एवं केंद्रीय अधिकारी विजय शर्मा भी बने। नौशाद अहमद दूबे के आमंत्रण पर पहुंचे विजय शर्मा ने उनके गोत्र के नाम पर स्थापित श्री वत्स गौशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने नौशाद अहमद दूबे के पूर्वज लाल बहादुर दूबे के नाम पर बने मार्ग का भी अवलोकन किया। वक्ताओं ने अपनी जड़ों से जुड़ने पर दिया जोर विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि बिछड़े खानदान के लोगों का यह मिलन नौशाद अहमद दूबे के प्रयासों से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ने पर बिछड़े रिश्तेदारों को खोजा जा सकता है और ऐसे प्रयास सामाजिक संबंधों को मजबूत करते हैं। कुटुंब प्रबोधन के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. शुकदेव त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास की घटनाओं ने परिवार को अलग कर दिया था, लेकिन सभी एक ही पूर्वजों की संतान हैं और उनकी परंपराएं भी साझा हैं। महंत प्रभु रामदास ने कहा कि परिवार के लोग एक मां की संतान हैं। उनके मुताबिक, इस मिलन ने धार्मिक पहचान से आगे बढ़कर पारिवारिक रिश्तों को महत्व देने का संदेश दिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना भारतवंशी ने किया। अंत में नौशाद अहमद दूबे ने सभी अतिथियों और रिश्तेदारों का आभार जताया।

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