शिलांग3 मिनट पहले
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मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले के डोमक्यरकोह गांव में शुक्रवार को एक बीमार शिशु की उसकी मां की गोद में ही मौत हो गई। उसकी मां करीब तीन घंटे तक उसे गोद में लेकर इलाज के लिए पैदल चली।
ग्रामीणों के मुताबिक, खराब सड़क के कारण कोई भी गाड़ी गांव में आने को तैयार नहीं थी। उन्होंने परिवार से बच्चे को करीब 10 किलोमीटर दूर मावडेट गांव लाने को कहा था।
परिवार ने रातभर बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए वाहन का इंतजाम करने की कोशिश की। वाहन नहीं मिलने पर माता-पिता अगले दिन पैदल निकल पड़े। ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते में ही शिशु की मौत हो गई।
यह घटना रामब्राई-ज्यरनगम विधानसभा क्षेत्र के डोमक्यरकोह गांव की है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें परिवार बच्चे को ले जाता दिख रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि वाहन चालकों ने सड़क की खराब हालत का हवाला देकर गांव में आने से इनकार कर दिया था। उन्होंने परिवार को मावडेट गांव पहुंचने के लिए कहा था। वहां से बच्चे को वाहन से ले जाने की बात कही गई थी।
कोई दूसरा रास्ता नहीं होने पर माता-पिता ने बच्चे को लेकर पैदल यात्रा शुरू की। ग्रामीणों के अनुसार, करीब तीन घंटे की यह यात्रा शिशु के लिए जानलेवा साबित हुई।
इस घटना ने इलाके में सड़क संपर्क को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर तब, जब मेनॉप, माविओंग, रामब्राई और डोमक्यरकोह को जोड़ने के लिए ₹25 करोड़ की सड़क परियोजना घोषित की गई थी।
उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसॉन्ग ने पहले 10 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसका मकसद इलाके की कनेक्टिविटी सुधारना था।
इस परियोजना से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, बाजारों और अन्य जरूरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क अब भी खराब हालत में है।
ग्रामीणों के मुताबिक, आपात स्थिति और रोजमर्रा के सफर के लिए लोग अब भी पगडंडियों पर निर्भर हैं। घटना ने ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के अमल और दूरदराज के इलाकों तक बुनियादी सेवाएं पहुंचाने पर भी सवाल खड़े किए हैं।
गांव के मुखिया बी सिएम ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होने देने की अपील की। डिप्टी कमिश्नर ने मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
