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रायबरेली में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और फ्लाईओवरों पर प्रकाश व्यवस्था बदहाल है। कुंभ मेले से पहले लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर लाखों रुपए की लागत से लगाई गईं स्ट्रीट लाइटें अब शो-पीस बनी हुई हैं। कई जगह लाइटें पूरी तरह बंद हैं तो कहीं लगातार जलने-बुझने से वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे स्थित मालिकमऊ फ्लाईओवर की स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह बंद पड़ी हैं। वहीं मुंशीगंज में सई नदी पर बने पुल की बत्तियां भी लंबे समय से नहीं जल रही हैं। रात होते ही इन स्थानों पर अंधेरा छा जाता है, जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती है। ‘डिस्को लाइट’ बनीं स्ट्रीट लाइटें मामा चौराहे से सई पुल के बीच लगी स्ट्रीट लाइटें खराब होने के कारण लगातार जलती-बुझती रहती हैं। इससे रात में चालकों की आंखों पर चौंध पड़ती है और सड़क को लेकर भ्रम की स्थिति बनती है। वाहन चालकों के लिए यह स्थिति हादसे का खतरा बढ़ा रही है। 15 दिन से बंद है मामा चौराहे का हाईमास्ट मामा चौराहे पर ट्रैफिक बूथ और ब्रिज के पास लगी बड़ी हाईमास्ट लाइट भी करीब 15 दिनों से बंद है। इससे पूरे चौराहे पर रात के समय ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन रही है। अंधेरे में हाईवे के डिवाइडर और सड़क पर घूम रहे आवारा मवेशी वाहन चालकों को आसानी से दिखाई नहीं देते। डिवाइडर और मवेशियों से टकराने का खतरा लाइटें बंद होने के कारण तेज रफ्तार वाहन चालकों को रात में डिवाइडर और आवारा मवेशी समय पर नजर नहीं आते। इससे वाहनों के मवेशियों से टकराने या अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार वाहनों की टक्कर में राहगीर और चालक घायल भी हो चुके हैं। करोड़ों खर्च के बाद भी रोशनी का इंतजार कुंभ मेले और हाईवे निर्माण के दौरान प्रकाश व्यवस्था पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। इसके बावजूद लोगों को रात में अंधेरे में सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों ने एनएचएआई और संबंधित कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से खराब लाइटों और केबल फॉल्ट को तत्काल ठीक कराने की मांग की है।
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रायबरेली में करोड़ों खर्च फिर भी हाईवे पर अंधेरा:मालिकमऊ फ्लाईओवर और मुंशीगंज सई पुल की लाइटें बंद; मामा चौराहे का हाईमास्ट 15 दिन से ठप