![]()
लखनऊ में जमीनी विवाद में मृतक के शव का 5वें दिन अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों का आरोप है कि पैतृक खेत में अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान चचेरे भाइयों ने उन्हें रोक दिया और चिता से लकड़ियां हटा दीं। इसके बाद जमीन में हिस्सा देने की मांग को लेकर विवाद बढ़ गया। गुरुवार को तहसीलदार और पुलिस टीम गांव पहुंची। दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन मृतक के परिजन अपनी मांग पर अड़े रहे। परिजनों ने विवादित जमीन में हिस्सा नहीं मिलने पर सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन और जाम लगाने की की बात भी कही। हालांकि अधिकारियों के समाझाने पर रात 8 बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया। अब पढ़िए पूरा मामला… माल थाना क्षेत्र के आदमपुर गांव के रहने वाले जयप्रकाश (32) लांड्री में काम करने के लिए पंजाब के भटिंडा जा रहे थे। जयप्रकाश के भाई आशीष ने बताया कि दिल्ली पहुंचने पर आनंद विहार में उनकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान 27 सितंबर को उनकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर परिजन बुधवार को शव लेकर पैतृक गांव पहुंचे। परिजनों के मुताबिक, पैतृक खेत में अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान चचेरे भाइयों रमेश, गुरदीन, राजकुमार और रोहित ने शव का अंतिम संस्कार करने से रोक दिया और चिता से लकड़ियां हटा दीं। चचेरे भाइयों से जमीन को लेकर विवाद सामने आया। परिजनों का कहना है कि उनके बाबा शिवमंगल ने करीब दो साल पहले अपनी दो बीघा जमीन का दानलेख तीन पुत्रों के परिवार के पक्ष में कर दिया था। मृतक के पिता को दादा ने जमीन से बेदखल किया था इसमें मृतक जयप्रकाश के पिता स्वर्गीय कृपाशंकर के परिवार को हिस्सा नहीं दिया गया। वहीं, शिवमंगल का आरोप है कि उन्होंने खेत की लकड़ी करीब नौ लाख रुपए में बेचकर जयप्रकाश को मेडिकल स्टोर और कपड़ों की दुकान खुलवाने के लिए रुपए दिए थे। आरोप है कि जयप्रकाश ने रकम खर्च कर दी और परिवार को कोई सहयोग नहीं किया। इसी कारण उन्होंने अपनी जमीन पुत्रों और पोतों के नाम कर दी। गुरुवार को राजस्व विभाग की टीम ने पहुंचकर मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए समझाया लेकिन वे किसी भी तरह से नहीं माने। कुछ घंटे बाद अधिकारियों और पुलिस के समझाने पर परिजनों ने उसी विवादित जमीन पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। उसी जमीन पर शव का अंतिम संस्कार किया तहसीलदार नितिन सिंह ने बताया कि गुरुवार को लेखपाल और पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचकर मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए पैतृक खेत में 100 वर्गफुट जमीन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए। वह दानलेख निरस्त कर जमीन में हिस्सा दिए जाने की मांग पर अड़े हैं। इस संबंध में माल इंस्पेक्टर नवाब अहमद ने बताया कि जमीन को लेकर परिजनों में विवाद हो रहा था। जिसके बाद दोनों पक्षों के समझाने के बाद उसी जमीन पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
Source link
जमीन विवाद में 5वें दिन शव का अंतिम संस्कार:लखनऊ में चचेरे भाइयों ने चिता से लकड़ियां हटाईं, अधिकारियों के समझाने पर माने