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प्रयागराज के चौधरी महादेव प्रसाद (सीएमपी) डिग्री कॉलेज में पिछले 15 दिनों से चल रहे राजभाषा पखवाड़े का समापन समारोह बुधवार को हुआ। इस अवसर पर ‘सृजन भाषा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच के संतुलन पर विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई, जिसके बाद प्रोफेसर सरोज सिंह ने अतिथियों का स्वागत कर विषय की रूपरेखा रखी। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक शोध संस्थान के निदेशक प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महज एक मशीनी दुनिया है, जो इंसानी संवेदनाओं और भावनाओं की गहराई को पूरी तरह अभिव्यक्त नहीं कर सकती। सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में इसका विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही मानवीय संवेदनाओं का घटना चिंता का विषय है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महाविद्यालय विकास परिषद के अधिष्ठाता प्रोफेसर अजय जेटली ने कला और तकनीक की तुलना करते हुए कहा कि रंगों, तूलिका और दिल की गहराइयों से होने वाले सृजन की नकल एआई नहीं कर सकती। विशिष्ट अतिथि, अपर पुलिस आयुक्त विजय ढुल ने एक प्रेरक कहानी के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया और आधुनिक युग में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर अजय प्रकाश खरे ने एआई के बढ़ते इस्तेमाल के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। कवि सम्मेलन में गूंजी ओजस्वी और मार्मिक रचनाएं मुख्य सत्र के बाद आयोजित कवि सम्मेलन में श्लेष गौतम, विनम्र सेन सिंह, कविता कादंबरी, शिवांगी गोयल, चेतन यादव, कंचन सिंह, अंबुज यादव, उषा नंदन, अर्पित पाण्डेय और सुशांत ने कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. रंजीत सिंह ने तथा आभार ज्ञापन प्रोफेसर आभा त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रेम शंकर सिंह, प्रो. अर्चना खरे, भावना चौहान, प्रो. नीता सिन्हा, एसपी सिंह, पूजा गोंड, प्रियंका गोंड, राजेंद्र यादव, जी. गणेशन मिश्रा, रामानुज यादव आदि थे।
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प्रयागराज के सीएमपी महाविद्यालय में 'सृजन और AI' पर मंथन:राजभाषा पखवाड़ा में कवियों ने बांधा समां