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कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील क्षेत्र में तीन दिन से लगातार हो रही बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे करीब 24 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। खेतों में पानी भरने से धान, बाजरा और मक्का की पकने की कगार पर पहुंची फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों के सामने फसल बर्बाद होने से बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी कुर्सी खेड़ा के मजरा खरगपुर में बताई जा रही है, जहां खेतों के साथ कई घरों तक पानी पहुंच गया है। वहीं पलिया बांसखेड़ा, अंता, घाघू, मितई निवादा और खिरिया समेत पांडु नदी से लगे गांवों में भी हजारों बीघा फसल पानी में डूबी हुई है। तीन तस्वीरें देखें इन गांवों में हालात बिगड़े ऊंची गहदेवा और तोरना सहित कई गांवों में खेत पूरी तरह जलमग्न हैं। मुख्य मार्गों पर पानी भरने से ग्रामीणों को भी आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि बीमार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण शिवरतन और किसान जितेंद्र ने बताया कि खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब चुकी है और अगर पानी जल्द नहीं निकला तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। नन्ही देवी, शिवकान्ती और राम बेटी ने भी जलभराव से घर और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने की बात कही। वहीं बीमार बुजुर्ग ग्रामीण परशुराम ने बाढ़ के बीच स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को बताया। ग्रामीणों का आरोप है कि सितंबर की शुरुआत में भी बाढ़ जैसे हालात बने थे, लेकिन सूचना के बावजूद अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लेखपाल पर भी एक ही स्थान पर बैठकर जांच करने और कागजी खानापूर्ति करने का आरोप लगाया गया है। वहीं एसडीएम अभिषेक कुमार का कहना है कि पानी कम होने के बाद टीम मौके पर पहुंचकर फसल और अन्य नुकसान का आकलन करेगी।
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पांडु नदी उफनाई, 24 गांव में बाढ़ जैसे हालात:कानपुर देहात में तीन दिन की बारिश से हजारों बीघा फसल डूबी, किसान मायूस