![]()
DGP विनय कुमार के VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने के बाद बिहार का अगला पुलिस कप्तान कौन होगा? प्रीता वर्मा, बी श्रीनिवासन, जितेंद्र सिंह गंगवार से लेकर तेजतर्रार IPS अफसर कुंदन कृष्णन तक के नाम रेस में हैं। कौन बन सकता है, कौन नहीं?, CM सम्राट की पसंद कुंदन कृष्णन के बनने की राह में क्या रोड़े हैं, जानेंगे; आज बूझे की नाही में…। सवाल-1ः बिहार के अगले DGP की रेस में कौन-कौन IPS अफसर? जवाबः तत्कालीन DGP विनय कुमार 15 सितंबर को 21 दिनों की लंबी छुट्टी पर गए। उस वक्त सरकार ने सीनियरिटी के हिसाब से 1991 बैच की IPS अफसर प्रीता वर्मा को 5 अक्टूबर तक के लिए कार्यवाहक DGP बना दिया। इस बीच विनय कुमार ने 25 सितंबर को VRS ले ली। जिसे सरकार ने 26 सितंबर को मंजूर कर लिया। यानी अब DGP का पद स्थायी तौर पर खाली हो गया है। फिलहाल सीनियरिटी के हिसाब से 3 IPS अफसरों के नाम DGP की रेस में आगे बताए जा रहे हैं। इन सबके अलावा 1994 बैच के IPS अफसर कुंदन कृष्णन का नाम CM सम्राट चौधरी की पसंद के तौर पर चर्चा में है। सवाल-2ः कौन DGP बन सकता है और क्यों? जवाबः सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) टॉप-3 सीनियर IPS अफसरों की लिस्ट फाइनल करके राज्य सरकार को भेजता है, जिसमें से किसी एक को राज्य सरकार DGP बनाती है। इस हिसाब से लिस्ट में प्रीता वर्मा, बी श्रीनिवासन और जितेंद्र सिंह गंगवार के नाम हो सकते हैं। इनमें से कौन DGP बन सकता है, किसके कितने चॉसेंज हैं, समझिए… प्रीता वर्माः दलित महिला कार्ड, लेकिन कड़क मिजाजी नहीं राजस्थान की रहने वाली 1991 बैच की IPS अफसर प्रीता वर्मा दलित समाज से आती हैं। वह झारखंड की तेजतर्रार IAS अफसर और चीफ सेक्रेटरी रहीं राजबाला वर्मा की बहन हैं। फिलहाल राज्य सरकार ने इन्हें 5 अक्टूबर 2026 तक के लिए कार्यवाहक DGP बनाया है। यह पुलिस सेवा से 30 जून 2028 को रिटायर होंगी। क्यों बन सकती हैं… अंदरखाने चर्चा है कि प्रीता वर्मा को DGP बनाने से सरकार की इमेज में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना बेहद कम है। इसलिए इनकी DGP बनने की दावेदारी कमजोर हो रही है। बी श्रीनिवासनः RSS की पहली पसंद, रेस में आगे उत्तर प्रदेश के रहने वाले 1992 बैच के IPS अफसर भृगु (बी) श्रीनिवासन अभी सेंट्रल डेपुटेशन पर हैं। यह सीनियरिटी लिस्ट में दूसरे नंबर के IPS अफसर हैं। 31 अगस्त 2027 को रिटायर होंगे। क्यों बन सकते हैं… हालांकि, इनका कमजोर पक्ष है कि ये ज्यादा समय तक दिल्ली डेपुटेशन पर ही रहे हैं। राज्य की पुलिसिंग का लंबा अनुभव नहीं है। बिहार की एक लॉबी भी इनके नाम पर सहमत नहीं है। अभी सेंट्रल डेपुटेशन पर हैं। केंद्र सरकार ने रिलीज नहीं किया है। जितेंद्र गंगवारः राज्य की पुलिसिंग का लंबा अनुभव, सरकार से अच्छे संबंध UP के रहने वाले जितेंद्र सिंह गंगवार 1993 बैच के IPS अफसर हैं। कुर्मी समाज से आने वाले गंगवार 31 जुलाई 2027 को रिटायर होंगे। यह सीनियरिटी लिस्ट में तीसरे नंबर के अफसर हैं। क्यों बन सकते हैं… नीतीश कुमार के करीबी अफसर हैं। हालांकि, CM सम्राट चौधरी से भी उनका संबंध बेहतर है। खास बात है कि गंगवार लंबे समय तक फील्ड में राज्य के अलग-अलग इलाकों में काम कर चुके हैं। अंदरखाने चर्चा है कि सरकार एक ऐसा DGP चाहती है, जो पुलिसिंग को बेहतर कर सके। गंगवार के पास राज्य की पुलिसिंग का लंबा अनुभव है। उनके पास झारखंड के गढ़वा, चतरा और पलामू के साथ बिहार के रोहतास, कैमूर, नालंदा, नवादा और जहानाबाद जैसे जिलों में नक्सली गतिविधियों को रोकने का अनुभव है। 2005 में नीतीश सरकार ने जब 1989 के भागलपुर दंगा मामले की जांच दोबारा शुरू कराई, तब इन्हें भागलपुर का SP बनाकर भेजा गया। दंगे के आरोपियों को सजा तक पहुंचाने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अहम रही। नवादा, शेखपुरा और नालंदा में जातीय तनाव व हिंसा के दौरान भी इन्होंने कानून-व्यवस्था संभाली। अशोक महतो और राजो सिंह से जुड़े जातीय तनाव के दौर में भी उन्होंने पुलिसिंग की जिम्मेदारी संभाली और हिंसा पर नियंत्रण पाने में भूमिका निभाई। इस तरह उनके पास नक्सल, दंगे, जातीय संघर्ष रोकने का लंबा अनुभव है। निगरानी, साइबर, EOU में भी काम करने का अनुभव है। यही कारण है कि उनका नाम प्रीता वर्मा से आगे है। उनके बनने की ज्यादा संभावना है। हालांकि, इन्हें भाजपा के मन-मिजाज का अफसर नहीं माना जाता है। सवाल-3ः …तो CM सम्राट की पसंद कुंदन कुष्णन कैसे बनेंगे? जवाबः सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक, 1994 बैच के तेजतर्रार IPS अफसर कुंदन कृष्णन का फिलहाल कम से कम 7 महीने तक DGP बनना मुश्किल है। अगर सरकार को इन्हें DGP बनाना है तो उसे 2 काम करने होंगे। 1. अप्रैल 2027 तक कार्यवाहक DGP से काम चलाए बिहार सरकार को अगले 7-8 महीने यानी अप्रैल-मई 2027 तक कार्यवाहक DGP से ही काम चलाना होगा। तब ही कुंदन कृष्णन के DGP बनने का रास्ता साफ होगा। इसे ऐसे समझिए… तब सरकार के पास सिर्फ एक ही तरीका बचता है कि वह कुंदन कृष्णन के सुप्रीम कोर्ट की क्राइटेरिया पर फीट बैठने का इंतजार करे और तब तक कार्यवाहक DGP से काम चलाए। दरअसल, अप्रैल-मई 2027 में कुंदन कृष्णन DGP बनने के योग्य हो जाएंगे। इसे ऐसे समझिए… फिर सरकार सीनियरिटी में टॉप-3 IPS अफसरों में से कुंदन कृष्णन को DGP बना सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर कार्यवाहक DGP बनाए जाने पर चिंता जताई है। अदालत लगातार इसको लेकर गाइडलाइन जारी कर रही है। 5 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को आदेश दिया था… 2. अक्टूबर में नया DGP बनाएं, वरना आगे की राह भी कठिन होगी अगर सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी फजीहत नहीं करानी है तो उसे कार्यवाहक के बजाय स्थायी DGP बनाना होगा। इस हिसाब से फिलहाल कुंदन कृष्णन का DGP बनना मुश्किल है। लेकिन अगर सरकार स्याथी DGP बनाने में देर करेगी तो कुंदन कृष्णन के लिए आगे की राह भी मुश्किल हो जाएगी। इसलिए अगर उनको आगे भी DGP की रेस में बनाए रखना है तो सरकार को अक्टूबर 2026 में ही स्थायी DGP बनाना होगा। इसे ऐसे समझिए… बाहुबली आनंद मोहन से टकराने वाले कुंदन कृष्णन को जानिए… 2006 में IPS अफसर कुंदन कृष्णन और बाहुबली नेता आनंद मोहन के बीच टक्कर हुई थी। तब कुंदन पटना के एसपी सिटी थे। आनंद मोहन की देहरादून में एक मामले को लेकर पेशी थी। उन्हें सहरसा जेल से देहरादून ले जाया गया। लौटते वक्त आनंद मोहन सहरसा जेल न जाकर पटना के एक होटल में रुक गए। कुंदन कृष्णन को पता चला तो वह रेलवे स्टेशन के पास स्थिति उस होटल में गए। यहां उनकी टीम की भिड़ंत आनंद मोहन के समर्थकों से हुई। कुंदन कृष्णन आनंद मोहन को जेल भेजकर माने।
Source link
प्रीता, गंगवार, श्रीनिवासन…बिहार का नया DGP कौन?:आनंद मोहन से टकराने वाले कुंदन कृष्णन की राह में 2 पेंच, जानिए RSS की पसंद