मंडी शुल्क से महंगा पड़ रहा आटा मैदा सूजी कारोबार:लखनऊ में मिलर्स ने घटाने की मांग उठाई, सरकार से यूपी को उत्पादक राज्य घोषित करने का आग्रह


लखनऊ के ताज होटल में शनिवार को उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन की 63वीं वार्षिक आम सभा हुई। इसमें प्रदेशभर के मिलर्स, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों और विशेषज्ञों ने गेहूं की उपलब्धता, मंडी शुल्क, नई तकनीक और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा की। एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने कहा कि मंडी शुल्क के कारण यूपी में आटा, मैदा और सूजी की लागत बढ़ रही है। इससे दूसरे राज्यों के मुकाबले कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी शुल्क और परिवहन लागत से बढ़ रही उत्पादन लागत एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक गेहूं उत्पादन करने वाले राज्यों में शामिल है, लेकिन यहां के उद्योगों को दूसरे राज्यों से भी गेहूं मंगाना पड़ता है। पंजाब और हरियाणा से गेहूं लाने पर परिवहन खर्च बढ़ जाता है। वहीं, पड़ोसी राज्यों में मंडी शुल्क नहीं होने से वहां के उत्पादों की लागत कम रहती है।
उन्होंने सरकार से यूपी को उत्पादक राज्य घोषित करने और मंडी शुल्क की समस्या दूर करने की मांग की। बजाज ने कहा कि इससे मिलिंग उद्योग अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन कर सकेगा। किसानों को उपज का उचित मूल्य मिलने के साथ रोजगार और राजस्व बढ़ाने के अवसर भी पैदा होंगे। डीडीजीएस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग बजाज ने पशु आहार में डीडीजीएस (ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेंस विद सॉल्यूबल्स) के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि इसका उपयोग दूध देने वाले पशुओं के चारे में किया जा रहा है और इससे पशुओं के स्वास्थ्य के साथ दूध की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। हालांकि, इस संबंध में आम सभा में कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख नहीं है। आधुनिक तकनीक और खाद्य सुरक्षा पर मंथन कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि गेहूं खाद्य सुरक्षा और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। मिलिंग उद्योग को उत्पादन के साथ गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। कृषि आधारित उद्योग किसानों को बाजार और युवाओं को रोजगार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो संदेश के जरिए एसोसिएशन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संगठन 1962 से मिलिंग उद्योग के हितों, समस्याओं के समाधान और आधुनिकीकरण के लिए काम कर रहा है।
खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने किसान से खरीद, भंडारण, परिवहन और उपभोक्ता तक खाद्यान्न पहुंचाने की पूरी श्रृंखला में प्रसंस्करण उद्योग की भूमिका पर जोर दिया। एसोसिएशन ने किए दो समझौते, उद्यमियों को सम्मान आम सभा में मिलिंग उद्योग के भविष्य, गेहूं की उपलब्धता, खरीद नीति और निर्यात पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए। विशेषज्ञों ने स्वचालन, ऊर्जा बचत, खाद्य सुरक्षा और मूल्यवर्धित उत्पादों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान एसोसिएशन ने SIDBI और IGrain के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। शाम को गोल्डन ग्रेन अवॉर्ड्स के तहत मदन लाल जिंदल, रामचंद्र सिंघल, प्रमोद वैश्य समेत कई वरिष्ठ उद्यमियों को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान दिया गया। युवा उद्यमिता, मिलिंग तकनीक, ऊर्जा दक्षता और महिला उद्यमिता के क्षेत्र में भी सम्मान प्रदान किए गए।

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