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कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा मर्डर केस में जेल में बंद शालू अब जेल से बाहर आ जाएगी। कल्याणपुर थाने की पुलिस शालू के पक्ष में जेल से बाहर लाने के लिए कोर्ट में रिपोर्ट भेजेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बेगुनाह शालू को जेल से रिहा कर दिया जाएगा। पुलिस की प्राथमिक जांच और साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने उसे जेल भेजा था, लेकिन अब हत्यारोपियों की रिमांड के दौरान उसके बेगुनाही के साक्ष्य मिले और मास्टर माइंड शालू के पति सुब्रत को को पुलिस ने अरेस्ट करके जेल भेज दिया। किस रिपोर्ट के आधार पर एक सप्ताह के भीतर शालू जेल से बाहर आ जाएगी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट। पति से शालू के खिलाफ गढ़े थे साक्ष्य, रिमांड पर सामने आ गया झूठ पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि विनीत मिनोचा मर्डर केस के बाद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर शालू को जेल भेजा गया। पुलिस की जांच में अब वह निर्दोष है तो उसके पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगाकर बीएनएसएस की धारा 189 के तहत कोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी । दो से तीन दिनों में पुलिस यह कार्रवाई करेगी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आएगी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि सुब्रत पहले वह चाचा को फंसाना चाहता था। ऐसा इसलिए, जिससे कोई पैरवी करने वाला न बचे। उसने यह बात स्वीकार की है, लेकिन विशाल ने शालू का नाम ले लिया। उसे लग रहा था कि पुलिस उसे पकड़ लेगी। लेकिन जब उससे ही पुलिस सहयोग लेने लगी तो फिर उसने बचने की साजिश शुरू कर दी। खुद को बचाने के लिए वकीलों से बात की। उनके कहने पर ही वह पिता की हत्या की साजिश की बात नहीं कुबूल रहा था। 17 बार चाकू से विनीत को गोदा और गर्दन रेती पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 5 सितंबर की रात 9:38 पर पार्टी के लिए सुब्रत घर से निकला था। उसके आठ मिनट बाद 9:46 बजे सीसीटीवी में विशाल और राजकिशोर फ्लैट में घुसते हुए दिखाई दिए। रात 10:45 बजे दवा कारोबारी विनीत मिनोचा फ्लैट में दाखिल हुए। विशाल फ्लैट के ड्राइंग रूम में छिपा था, जबकि राजकिशोर सुब्रत के बेडरूम में। इस दौरान दोनों ने तीन बार एक दूसरे से मोबाइल पर बात की। जिसके बाद रात 11:15 बजे दोनों ने मिलकर दवा कारोबारी की हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले, सीने समेत शरीर के अन्य हिस्सों में 17 चाकू के घाव मिले थे। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि घर में लूटपाट नहीं मिली तभी हत्या में किसी करीबी का हाथ होने की आशंका हुई। इसके बाद पुलिस ने एनकांउटर में विशाल और राजकिशोर को पकड़ लिया। विशाल ने शालू का नाम लिया था तो उसे जेल भेजा गया। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जब उनकी टीम ने डिजिटल साक्ष्यों पर काम शुरू किया तो परतें खुलती चली गईं थी। चार राउंड की पूछताछ के बाद टूटा सुब्रत एक मई से दो सितंबर के बीच सुब्रत की कॉल डिटेल निकाली गई तो विशाल से उसकी 258 बार बातचीत निकली जबकि नए नंबर से सात बात बार हुई थी। इसी तरह 29 मई से तीन सितंबर तक शालू की विशाल से 28 बात बात हुई जबकि नए नंबर से छह बार बात हुई। बुधवार को हुई चार राउंड की पूछताछ में पुलिस ने सुब्रत के सामने सभी साक्ष्य रखे, लेकिन वह हत्या कराने की बात मानने को ही तैयार नहीं था। दोपहर में पुलिस कमिश्नर ने शालू, सुब्रत, विशाल और राजकिशोर से खुद पूछताछ की। इसके बाद रात करीब 2:30 बजे सख्ती से हुई पूछताछ में सुब्रत टूट गया। उसने कहा कि उसके कहने पर विशाल ने पिता को मौत के घाट उतारा। उसने अपना अपराध कुबूल करते हुए कहा, शालू निर्दोष है। पहले वह अपने चाचा को फंसाना चाहता था, लेकिन यह नहीं हो सका। सुब्रत ने बताया कि उसके घर में लगे सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस उसके पास था। हत्या के दिन उसी ने ही कैमरे बंद कर दिए थे। क्या है बीएनएसस की धारा 189 कानून में CRPC की धारा 169 अब (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता BNSS की धारा 189) से संबंधित है, जो पुलिस जांच में पर्याप्त सबूत न मिलने पर आरोपी को छोड़ने का प्रावधान करती है। अगर पुलिस जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत या ठोस आधार नहीं मिलते हैं। पुलिस अधिकारी ऐसे व्यक्ति को थाने से ही मुचलका या जमानत बांड लेकर रिहा कर देता है। बांड में यह शर्त होती है कि जरूरत पड़ने पर वह व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होगा।
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अब पुलिस की रिपोर्ट शालू को लाएगी जेल से बाहर:बेगुनाह होने के बाद भी करोड़पति कारोबारी की बहू ने 19 दिन जेल में काटा