Gorakhpur BJP Strategy 2027 | Sainthwar Brahmin Nishad Vote Bank Plan

गोरखपुर6 मिनट पहले

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गोरखपुर क्षेत्र में सैंथवार, ब्राह्मण और निषाद पर भाजपा का विशेष फोकस होगा। इनका जुड़ाव भी पार्टी से रहा है लेकिन 2027 के चुनाव को देखते हुए इस तरह की तैयारी की जा रही है कि विपक्षी दल इसमें सेंध न लगा सकें। तीन दिवसीय दौरे पर गोरखपुर आए राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने सभी जिला प्रभारियों को इस दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक के बाद रात में वह निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद के आवास भी पहुंचे थे। वहां उनके पूरे परिवार से मिले और बात की। जिन तीनों जातियों का जिक्र प्रदेश प्रभारी ने किया, उनकी नाराजगी को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रहती हैं। इसलिए अभी से पार्टी उन्हें साधने के इंतजाम में जुट गई है।

प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने संगठन की बैठक में तीन जातियों पर विशेष फोकस करने को कहा था।

प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने संगठन की बैठक में तीन जातियों पर विशेष फोकस करने को कहा था।

गोरखपुर क्षेत्र में प्रशासनिक दृष्टि से 10 जिले हैं, जबकि संगठनात्मक लिहाज से इनकी संख्या 12 है। सभी जिलों में अलग-अलग जातियों की बहुलता मिलती है, उसी के अनुसार रणनीति बनाई जाती है। लेकिन ब्राह्मण, निषाद व सैंथवार में से किसी का दूसरे दलों में खिसकना, भाजपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसीलिए सभी जिलाध्यक्षों को बूथ स्तर पर ही इन लोगों को जोड़ने को कहा गया है।

प्रदेश में ब्राह्मणों के नाराज होने की चर्चा चली

प्रदेश में ब्राह्मणों के नाराज होने की चर्चा चली। यूजीसी के मुद्दे पर सवर्ण मुखर हुए तब भी ब्राह्मणों के नाराजगी की बात सामने आयी। यह वर्ग हमेशा से भाजपा का कोर वोट बैंक माना जाता है।

ऐसे में यदि विपक्षी दल इसमें सेंध लगाने में कामयाब हो गए तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि अब ब्राह्मणों पर फोकस किया जा रहा है। गोरखपुर क्षेत्र के जिला प्रभारियों की जो सूची जारी हुई है, उसमें 12 में से 3 नाम ब्राह्मणों के हैं और 2 भूमिहार नेताओं के हैं। ब्राह्मण बहुल जिलों में ब्राह्मण नेताओं को तरजीह दी गई है।

विनोद तावड़े बैठक के बाद रात 10 बजे डा. संजय निषाद के घर गए थे। इसे निषाद मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

विनोद तावड़े बैठक के बाद रात 10 बजे डा. संजय निषाद के घर गए थे। इसे निषाद मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सैंथवार भी कर चुके हैं आंदोलन, निषाद की सामने आयी थी नाराजगी

गोरखपुर क्षेत्र के कुछ जिलों में सैंथवार मतदाताओं की भी अच्छी-खासी संख्या है। गोरखपुर में पूर्व विधायक स्व. केदार सिंह की प्रतिमा को हटाने के विरोध में आंदोलन हुआ था। सैंथवार मल्ल महासभा इसमें शामिल हुआ था। कई दिनों की मशक्कत के बाद किसी तरह यह मामला शांत हुआ लेकिन सैंथवार समाज की मांगे पूरी करनी पड़ीं।

हालांकि इस घटना के बाद इस वर्ग में नाराजगी देखी जाती है। लोकसभा चुनाव 2024 में इस वर्ग ने कुशीनगर जिले में सपा से आए सजातीय उम्मीदवार का साथ दिया था।

बात निषाद मतदाताओं की करें तो अब भी उनकी नजदीकी निषाद पार्टी से है। सपा की ओर से भी इसमें सेंध लगाने का प्रयास किया जा रहा है। गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र में ही लगभग 4 लाख से अधिक निषाद हैं। निषाद मतदाताओं को साधने के लिए ही भास्कर निषाद को क्षेत्रीय महामंत्री का दायित्व भी दिया गया है।

इसके साथ ही डा. संजय निषाद को भी साथ लेकर चलने की तैयारी है। डा. संजय निषाद के नाराजगी की चर्चा के बीच प्रदेश प्रभारी तावड़े उनके आवास पर पर पहुंचे थे। पूरे परिवार से मिले, जिसके बाद नाराजगी की खबरों पर विराम लग गया।

अलग-अलग वर्गों में पकड़ मजबूत करना चाहती है भाजपा वरिष्ठ पत्रकार आलोक दूबे बताते हैं कि विनोद तावड़े ने बैठक में ब्राह्मण, निषाद व सैंथवार पर फोकस करने को कहा। उन्होंने बूथ स्तर पर उन्हें जोड़ने को कहा है। गोरखपुर क्षेत्र के अलग-अलग जिलों में इन जातियों की अच्छी-खासी संख्या है। ऐसे में इनका साथ तो चाहिए ही।

तावड़े ने एक और बात कही थी कि सपा 30 प्रतिशत वोटों से शुरू करेगी और हम 10 प्रतिशत से। इसका अर्थ था कि सपा के पास यादव व मुस्लिम वोट बैंक है जबकि भाजपा के पास ऐसे किसी जाति का फिक्स वोटबैंक नहीं है। पार्टी को लाभार्थियों पर भरोसा है। जिन जातियों की बात की जा रही है, वे अक्सर भाजपा के साथ नजर आते हैं। ऐसे में उन्हें साथ रखना भी चुनौती है।

उन्होंने कहा कि मिशन-2027 में भाजपा का फोकस ‘सबके साथ’ की सोशल इंजीनियरिंग पर है। पूर्वांचल में जातीय समीकरण चुनावी राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं और भाजपा के लिए इन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं है। सपा के पीडीए समीकरण के सामने भाजपा किसी एक सामाजिक समूह तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

निषाद समाज को लेकर तावड़े की संजय निषाद से मुलाकात भी इसी राजनीतिक सक्रियता की वजह से हुई है। भाजपा का संदेश साफ है कि वोट की राजनीति में किसी एक खांचे पर निर्भर रहने के बजाय हर सामाजिक तबके तक पहुंच बनाई जाए।

————————- ये खबर भी पढ़ें यूपी में भाजपा ने 98 जिला प्रभारी घोषित किए:विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी चुनेंगे; पूर्व मंत्री सुरेश राणा को बुलंदशहर की जिम्मेदारी

यूपी में भाजपा ने अपने संगठनात्मक 98 जिलों में जिला प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने शनिवार शाम 7:30 बजे जिला प्रभारियों की लिस्ट जारी कर दी।

राजनाथ सिंह के बेटे और प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ससंदीय क्षेत्र रायबरेली का प्रभारी बनाया गया है। पूर्व मंत्री सुरेश राणा को बुलंदशहर और एमएलसी प्रांशु दत्त द्विवेदी को कानपुर महानगर दक्षिण का प्रभारी बनाया गया है। वह भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। प्रांशु भाजपा के दिवंगत नेता और पूर्व मंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी के भतीजे हैं। पढ़िए पूरी खबर

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