पोषण माह में सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती शिक्षा का सबसे अहम केंद्र बनाने पर जोर दे रही है। इसकी शुरूआत 9 सितंबर को वाराणसी से की गई थी।
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लेकिन वाराणसी के शहरी आंगनबाड़ी केंद्रों के रियलिटी चेक में तस्वीर एक जैसी नहीं मिली। लहरतारा में बच्चों के लिए फीडिंग इंडिया की ओर से तैयार पका भोजन रोज पहुंच रहा है, वहीं जगतगंज के कई केंद्रों पर अभी हॉट कुक भोजन शुरू नहीं हुआ है।
वहां बच्चों को स्नैक्स देने या घर से टिफिन लाने पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ केंद्रों पर निरीक्षण के दौरान बच्चे नहीं मिले तो एक केंद्र पर ताला लगा मिला।
लहरतारा में रोज पहुंच रहा खाना, 32 में 20-21 बच्चे आते हैं
लहरतारा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिमा वर्मा ने बताया कि उनके केंद्र पर 32 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें रोज करीब 20 से 21 बच्चे आते हैं। उनके मुताबिक बच्चों के लिए फीडिंग इंडिया की ओर से तैयार भोजन पहुंचाया जा रहा है।
प्रतिमा ने बताया कि केंद्र पर बच्चों की संख्या के हिसाब से भोजन आता है। संस्था की ओर से केंद्र पर आकर बच्चों की संख्या और व्यवस्था की जानकारी भी ली जाती है।
लहरतारा की ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनीता मिश्रा ने बताया कि वह करीब 15 साल से आंगनबाड़ी चला रही हैं। उनके केंद्र पर करीब 1300 की आबादी में 33 बच्चे पंजीकृत हैं और करीब 25 बच्चे रोज आते हैं।

उनके मुताबिक बच्चों के भोजन और पोषण को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। परिवारों को भी बच्चों के खानपान, मौसम के बदलाव और बीमारी के दौरान भोजन पर ध्यान देने के लिए जागरूक किया जाता है।
जगतगंज में पका भोजन नहीं आ रहा, बच्चों के टिफिन से चल रहा काम
लहरतारा से कुछ दूरी पर तस्वीर बदल जाती है। जगतगंज की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रचना पुष्कर ने बताया कि उनके केंद्र पर अभी बच्चों के लिए पका हुआ भोजन नहीं आ रहा है। उनके केंद्र में 12 बच्चे पंजीकृत हैं।
रचना के मुताबिक पहले आंगनबाड़ी में बच्चों के लिए खाना बनाया जाता था, लेकिन बाद में बच्चों के लिए बाहर से तैयार भोजन आने की सूचना मिली। इसके बाद केंद्र पर खाना बनाना बंद कर दिया गया। अब बच्चों को जरूरत के मुताबिक स्नैक्स दिया जाता है, जबकि कई बच्चे घर से टिफिन लेकर आते हैं।

स्कूल परिसर में चल रहे केंद्रों में भी अलग व्यवस्था
पिचाशमोशन के एक स्कूल परिसर में चल रहे दो आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ता के मुताबिक दोनों केंद्रों में कुल 21 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 4 से 6 साल के 7 बच्चे हैं और करीब 80 फीसदी बच्चों की नियमित उपस्थिति रहती है।
कार्यकर्ता ने बताया कि इन केंद्रों के लिए अभी अलग से हॉट कुक भोजन का पैसा नहीं आ रहा है। स्कूल में आने वाले भोजन में से ही आंगनबाड़ी के बच्चों को खाना दिया जा रहा है।
उनके मुताबिक आंगनबाड़ी बच्चों के लिए अक्षय पात्र के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए फॉर्म भरकर भेजा गया है और उम्मीद है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

15 सितंबर को कंपोजिट विद्यालय कबीरचौरा के आंगनवाड़ी में ताला लगा मिला।
डिजिटल निगरानी की जा रही है
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मुताबिक केंद्रों की निगरानी के लिए मोबाइल के जरिए भी जानकारी ली जाती है। दिन का मेन्यू मोबाइल पर आता है। भोजन के समय कितने बच्चे मौजूद हैं और कितने बच्चों ने खाना खाया, इसकी जानकारी और फोटो भी भेजनी पड़ती है।
केंद्र सरकार के अनुसार पोषण ट्रेकर ऐप के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों के खुलने, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, ECCE गतिविधियों, ग्रोथ मॉनिटरिंग तथा हॉट कुक्ड मील और THR की उपलब्धता जैसे मानकों की लगभग रियल टाइम निगरानी की जाती है।
सरकार का नियम क्या है?
केंद्र सरकार के मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों सहित अन्य पात्र लाभार्थियों को अनुपूरक पोषण देने का प्रावधान है। यह पोषण Take-Home Ration (THR), Morning Snack और Hot Cooked Meal (HCM) के रूप में दिया जाता है।
2026 में जारी व्यापक अनुपूरक पोषण गाइडलाइन में भोजन की गुणवत्ता, विविधता और स्वीकार्यता पर जोर दिया गया है। संशोधित पोषण मानक सिर्फ कैलोरी पर आधारित नहीं हैं, बल्कि पर्याप्त प्रोटीन, स्वस्थ वसा और जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को भी ध्यान में रखते हैं।

इसके साथ निर्धारित जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी पोषण व्यवस्था का हिस्सा हैं। 3 से 6 साल के बच्चों के लिए अनुपूरक पोषण में मॉर्निग स्नैक और हॉट कूक मील का प्रावधान है। इसलिए केवल यह कहना कि बच्चे को कभी-कभार कोई स्नैक दे दिया गया, पूरी पोषण व्यवस्था की जगह नहीं लेता।
2026 में हॉट कुक भोजन पर विशेष जोर
इस साल के पोषण माह में सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म पका भोजन में पांच प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
केंद्रों पर ताजा, विविध और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ मेन्यू में अलग-अलग खाद्य समूहों को शामिल करने और साप्ताहिक मेन्यू रोटेशन पर जोर दिया गया है। इसमें स्थानीय खाद्य पदार्थों, दालों, मिलेट्स और मौसमी सब्जियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया गया है।
9 सितंबर को वाराणसी से शुरू हुए पोषण माह 2026 में भी फ्रेस हॉट कूक मील, पर्याप्त प्रोटीन और आंगनबाड़ी केंद्रों की सामुदायिक निगरानी को प्रमुख मुद्दों में रखा गया है।
हर केंद्र पर मेन्यू बोर्ड लगाने का निर्देश
2026 की नई व्यवस्था में SNP मेनू बोर्ड को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। केंद्र पर मेन्यू बोर्ड में दैनिक भोजन और लाभार्थियों के पोषण अधिकार दिखाई देने चाहिए, ताकि अभिभावक भी देख सकें कि बच्चे को उस दिन क्या मिलना है।
सरकार ने आंगनबाड़ी प्रबंधन समितियों और मातृ समितियों को भोजन की गुणवत्ता और मेन्यू के पालन की निगरानी में शामिल करने पर भी जोर दिया है। पोषण माह के दौरान प्रत्येक केंद्र पर कम से कम एक AMC बैठक कराने का लक्ष्य रखा गया है।