मॉस्को7 मिनट पहले
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रूस में शुक्रवार यानी 18 सितंबर से तीन दिन का संसदीय चुनाव शुरू हो गया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया का संसद में दबदबा बरकरार रहने की उम्मीद है। वहीं, यूक्रेन युद्ध का खुलकर विरोध करने वाली याब्लोको पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है।
यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के इलाकों में भी वोटिंग हो रही है। यूक्रेन और यूरोपीय संघ ने वहां हो रहे मतदान को अवैध बताया है।

राष्ट्रपति पुतिन ने भी शुक्रवार को ऑनलाइन वोट डालकर चुनाव में हिस्सा लिया।
पुतिन की पार्टी का दबदबा फिर चुनाव जरूरी क्यों
क्रेमलिन के लिए यह चुनाव सिर्फ संसद के सदस्य चुनने तक सीमित नहीं है। पुतिन चाहते हैं कि बड़ी संख्या में लोग वोट डालें, ताकि यह संदेश जाए कि यूक्रेन युद्ध के बीच भी जनता सरकार और रूसी सैनिकों के साथ खड़ी है।
पुतिन ने शुक्रवार को ऑनलाइन वोट डाला। चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि लोगों का फैसला दिखाएगा कि लाखों लोग रूस के सैनिकों के साथ खड़े हैं और देश एकजुट है।
450 सीटों के लिए हो रही वोटिंग
- रूस के स्टेट ड्यूमा में 225 सीटों पर लोग राजनीतिक पार्टियों को वोट देंगे। बाकी 225 सीटों पर अलग-अलग इलाकों से खड़े उम्मीदवारों में से किसी एक को चुनेंगे।
- यूनाइटेड रशिया के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी, एलडीपीआर, ए जस्ट रशिया और न्यू पीपल जैसी पार्टियां भी चुनाव लड़ रही हैं।
- हालांकि, इन्हें रूस में सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष नहीं माना जाता। बड़े मुद्दों पर ये पार्टियां अक्सर सरकार का साथ देती हैं।
युद्ध विरोधी याब्लोको पार्टी चुनाव से बाहर
याब्लोको रूस की एकमात्र रजिस्टर्ड पार्टी थी, जो खुले तौर पर यूक्रेन युद्ध का विरोध करती रही है। पार्टी जंग खत्म करने और बातचीत के जरिए शांति की बात करती है।
रूस की सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में याब्लोको की उम्मीदवारों की सूची का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया।
कोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने चुनाव प्रचार में ऐसे लोगों से मिले पैसे का इस्तेमाल किया, जिन्हें विदेश से पैसा मिला था। इसके अलावा पार्टी ने कुछ तस्वीरों और दूसरी प्रचार सामग्री का बिना अनुमति इस्तेमाल किया। इंटरनेट पर प्रचार को लेकर भी पार्टी ने नियम तोड़े।
हालांकि, याब्लोको का कहना है कि उसे असल में यूक्रेन युद्ध के खिलाफ उसके रुख की वजह से चुनाव से हटाया गया।
पार्टी के कुछ उम्मीदवार अब भी अलग-अलग सीटों पर व्यक्तिगत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, कुछ दूसरे युद्ध विरोधी नेताओं को जेल भेजा गया है या उन्हें रूस छोड़ना पड़ा है।

विपक्षी पार्टी याब्लोको के नेता निकोलाय रिबाकोव इस महीने मॉस्को में एक कार्यक्रम के दौरान।
कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में भी वोटिंग
इस चुनाव में रूस पहली बार यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिजिया इलाकों के लोगों को भी शामिल कर रहा है।
रूस ने 2022 में इन चारों इलाकों को अपना हिस्सा बताकर अपने देश में शामिल करने का दावा किया था। लेकिन यूक्रेन और ज्यादातर दूसरे देश इसे नहीं मानते।
रूस का इन चारों इलाकों पर पूरा नियंत्रण भी नहीं है।
क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है, जिस पर रूस ने 2014 में कब्जा किया था।
डोनेट्स्क के रूस के कब्जे वाले हिस्से में वोट डालते लोगों के पास एक हथियारबंद रूसी सैनिक भी खड़ा दिखाई दिया।
यूक्रेन और EU बोले- चुनाव नहीं मानेंगे
यूक्रेन ने कब्जे वाले इलाकों में हो रहे मतदान को अवैध बताया है। उसने दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इन चुनावों और इनके नतीजों को मान्यता नहीं देने की अपील की है।
यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि वह इन इलाकों में हुए चुनाव और उनके नतीजों को मान्यता नहीं देगा।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगांड ने कहा कि रूस के लोगों को देश के भविष्य को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विकल्प नहीं मिल रहे हैं।
चुनाव पर्यवेक्षकों को नहीं बुलाया
रूस ने इस बार यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन यानी ओएससीई के चुनाव पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं किया है।
यूरोपीय संघ के मुताबिक, इससे चुनाव की निगरानी को लेकर सवाल उठते हैं। EU ने कहा है कि वह रूस के मानवाधिकार समूहों, स्वतंत्र मीडिया और नागरिक संगठनों का समर्थन जारी रखेगा।
