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‘मम्मी-पापा ढूंढना मत, मैं उसी लड़के के पास जा रही हूं। मुझे पता है कि मेरी शादी मेरे बॉयफ्रेंड से आप लोग कभी नहीं करेंगे। हमको खुश देखना चाहते हैं, तो कभी ढूंढने की कोशिश मत कीजिएगा।’ घर से भागने से पहले ये बातें 15 साल की लड़की ने अपने स्कूल की कॉपी में लिखीं। यह ताजा मामला गोरखपुर के खजनी इलाके का है। लड़की के भाई ने 16 सितंबर को खजनी थाने में आरोपी युवक पर अपहरण का मुकदमा कराया। बड़े भाई ने बताया कि कस्बे का ही एक युवक हमेशा बहन को भगाने की धमकी देता था। वह बोलता था कि भगाकर उससे शादी करूंगा। इसी बीच 13 सितंबर को मेरी बहन दोपहर बिना बताए कहीं चली गई। काफी ढूंढने पर भी वह नहीं मिली। तब उसका स्कूल बैग चेक किया गया, जिसमें उसने प्रेमी के साथ भागने की बात लिखी थी। युवक अपने प्रेमजाल में फंसाकर बहन को ले गया है। बहन के साथ अनहोनी हो सकती है। यह कोई पहला मामला नहीं है। ऐसे मामले रोज गोरखपुर जिले के 30 थानों से आ रहे हैं। थानों में एक दिन में 4 से 5 मामले केवल लड़कियों के भागने के दर्ज किए जा रहे हैं। लड़कियों को ढूंढने में हर थाने की पुलिस टीम परेशान है। ज्यादातर मामलों में पुलिस को शहर से बाहर या फिर प्रदेश से भी बाहर जाना पड़ता है। जबकि, लापता लड़कियों को ढूंढने के लिए मामूली रकम ही मिलती है। 13-14 साल की लड़कियाें को भी शादी की चाहत गोरखनाथ क्षेत्र से 22 अगस्त को 13 साल की 2 सहेलियां घर से निकलीं। दोनों शाम तक वापस नहीं आईं। काफी ढूंढने के बाद भी जब नहीं मिलीं, तो गोरखनाथ पुलिस को घरवालों ने सूचना दी। पुलिस ने FIR दर्ज कर लड़कियों को ढूंढने के लिए टीम बनाई। जांच में सामने आया है कि दोनों के बॉयफ्रेंड हैं, जिनके चक्कर में वे घर से भागी हैं। इसी तरह एम्स थाना क्षेत्र से 14 साल की लड़की पड़ोस में रहने वाले युवक के साथ 16 सितंबर को भाग गई। लड़की के घरवालों ने बताया कि कुशीनगर रिश्तेदार के घर गए थे। वहां से आने पर पता चला कि बेटी घर से भाग गई। एम्स थाने में मां ने बताया कि मेरी बेटी नाबालिग है। पड़ोस का ही युवक उसे शादी का झांसा देकर भगा ले गया है। मुकदमा दर्ज कर पुलिस आरोपी युवक को ढूंढ रही है। ऐसे मामलों को देखकर यही लग रहा कि 13-14 साल की उम्र में ही लड़कियों को शादी की चाहत होने लगी है। 16 सितंबर : एक दिन में लड़कियों के भागने के 5 केस दर्ज साइकोलॉजिस्ट बोलीं- आज की पीढ़ी बहुत कम उम्र में डेटिंग, रोमांस कर रही साइकोलॉजिस्ट श्वेता जॉनसन का कहना है- किशोर अवस्था में भावनाओं से जुड़े मस्तिष्क के तंत्र ज्यादा सक्रिय और संवेदनशील हो जाते हैं। जबकि, योजना बनाने, आवेगों पर नियंत्रण रखने और अपने फैसलों के परिणामों को समझने से संबंधित मस्तिष्क के हिस्से अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए होते हैं। बच्ची घर में लगातार आलोचना, दूसरों से तुलना, ज्यादा नियंत्रण या भावनात्मक दूरी का अनुभव करती है। तब उसे बाहर से मिलने वाला ध्यान, अपनापन और स्नेह ज्यादा आकर्षक और महत्वपूर्ण लग सकता है। आज की पीढ़ी बहुत कम उम्र में ही प्रेम-संबंधों, आकर्षण, डेटिंग, रोमांस और विवाह से संबंधित सामानों के संपर्क में आ जाती है। सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो और अन्य चीजें अक्सर रिश्तों के केवल आकर्षक और रोमांटिक पक्ष को प्रस्तुत करती हैं। जैसे सच्चा प्रेम, आदर्श जोड़ी, प्रेम के लिए त्याग, साथ भाग जाना और सुखद अंत… जबकि उसके बुरे परिणामों को नहीं दिखाती। बच्चों को समझाएं- बहकावे को कैसे पहचानें 12 से 14 साल की बच्ची की भावनाओं को “झूठा” या “महज बचपना” कहना उचित नहीं है। उसकी भावनाएं उसके लिए वास्तविक और गहरी हो सकती हैं। लेकिन, उन भावनाओं के आधार पर लिया गया विवाह का फैसला परिपक्व और दूरदर्शी निर्णय लेने की क्षमता के समान नहीं माना जा सकता। बच्चों को केवल यह सिखाना पर्याप्त नहीं है कि किसी के साथ घर से भागना नहीं है। उन्हें यह भी समझाना जरूरी है कि आकर्षण और प्रेम में क्या अंतर है? स्वस्थ संबंध की विशेषताएं क्या हैं? बहकावे को कैसे पहचाना जाए? अपनी भावनाओं से सुरक्षित और संतुलित तरीके से कैसे निपटा जाए? ————————– यह खबर भी पढ़िए- करोड़पति कारोबारी की बहू दुपट्टे से मुंह छिपाती रही, कानपुर पुलिस कोर्ट लेकर पहुंची कानपुर में करोड़पति दवा कारोबारी की हत्यारोपी बहू बुधवार को कोर्ट में पेशी के दौरान चेहरा छिपाती नजर आई। वह दुपट्टे से लगातार चेहरा ढकती रही और कैमरों से बचती नजर आई। उसने पुलिसकर्मियों से कहा- इनको रोको। इस दौरान उसकी बहन और भाई भी उससे मिलने कोर्ट पहुंचे। पढ़ें पूरी खबर…
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मम्मी-पापा ढूंढना मत… लिखकर लड़की प्रेमी संग भागी:कहा- आप बॉयफ्रेंड से शादी नहीं कराएंगे; गोरखपुर में एक दिन में 5 लड़कियां गायब