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सीतापुर में शहीद उधम सिंह की प्रतिमा करीब 15 साल बाद बुधवार शाम 5 बजे मिश्रिख कोतवाली के मालखाने से बाहर निकाली गई। न्यायालय के आदेश के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर भारतीय सिख संगठन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रतिमा को ससम्मान रिलीज कराया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ शोभायात्रा निकालकर प्रतिमा को नैमिषारण्य स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया। इस दौरान देशभक्ति के नारे लगाए गए। 2010 में स्थापना को लेकर हुआ था विवाद जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010 में नैमिष के ठाकुर नगर स्थित सार्वजनिक पार्क में शहीद उधम सिंह की प्रतिमा बिना अनुमति स्थापित की जा रही थी। इस पर ग्रामीणों ने विरोध किया, जिसके बाद मामला कोतवाली पहुंचा। प्रतिमा को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर मालखाने में रखवा दिया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद विवाद से जुड़े लोगों को जमानत मिल गई, लेकिन प्रतिमा करीब 15 साल तक मालखाने में रखी रही। कोर्ट के आदेश के बाद पूरी हुई प्रक्रिया प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान पर स्थापित कराने के लिए भारतीय सिख संगठन की ओर से लगातार कानूनी पैरवी की जा रही थी। न्यायालय के आदेश के बाद प्रतिमा को रिलीज करने का रास्ता साफ हुआ। बुधवार को संगठन के जिलाध्यक्ष गुरपाल सिंह की अगुवाई में 100 से अधिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मिश्रिख कोतवाली पहुंचे। आवश्यक लिखापढ़ी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रतिमा मालखाने से बाहर निकाली गई। फिलहाल गुरुद्वारा साहिब में रखी गई प्रतिमा प्रतिमा बाहर आते ही लोगों ने ढोल-नगाड़े बजाकर खुशी जताई और शहीद उधम सिंह के सम्मान में नारे लगाए। इसके बाद प्रतिमा को शोभायात्रा के रूप में नैमिषारण्य स्थित गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया। जिलाध्यक्ष गुरपाल सिंह ने कहा कि शहीद उधम सिंह ने देश की आजादी और स्वाभिमान के लिए अपना जीवन बलिदान किया था। प्रतिमा का वर्षों तक मालखाने में रखा रहना समाज के लिए पीड़ादायक था। उन्होंने बताया कि प्रतिमा फिलहाल गुरुद्वारा साहिब में सुरक्षित रखी गई है। सर्वसम्मति से निर्णय लेकर बाद में इसे किसी उपयुक्त और सम्मानजनक स्थान पर स्थापित किया जाएगा।
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मालखाने से बाहर आई शहीद उधम सिंह की प्रतिमा:15 साल बाद ढोल-नगाड़ों के साथ नैमिषारण्य गुरुद्वारा साहिब ले गए कार्यकर्ता